आखिर क्यों नहीं बन रहे नए जिले

आखिर क्यों नहीं बन रहे नए जिले

Districtचार नए जिलों के लिए शासन स्तर पर हुए होमवर्क को धरातल पर उतारने से सरकार डर रही है। कारण राजनीतिक दलों ने इसे वोटों से जोड़ दिया है।

जिला गठन और पुनर्गठन समिति नए जिलों के लिए मानक तैयार कर लिए हैं। उत्तर प्रदेश में जिला गठन को तय मानकों में राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक संशोधन किए गए है। राज्य के लिए बनाए गए इन मानकों के मुताबिक प्रदेश में 10 नए जिलों का गठन किया जा सकता है।

बहरहाल, जिला गठन और पुनर्गठन समिति ने चार नए जिलों का खाका तैयार कर सरकार से संस्तुति की है। इसमें कोटद्वार, यमुनोत्री, रानीखेत और डीडीहाट नाम से जिले शामिल है। बावजूद सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है। राज्य में तहसीलों का शतक पूरा करने वाली सरकार 13 जिलों से आगे नहीं बढ़ पा रही है।

दरअसल, नए जिले बनाने से प्रदेश सरकार डर रही है। कारण राजनीतिक दल इस मामले में वोट की राजनीति कर रहे हैं। सरकार को डर है कि एक जिले की घोषणा हुई तो अन्य क्षेत्रों से मांग उठेगी। दूसरा सरकारों की नीयत भी इस मामले के कभी साफ नहीं रही।

यही वजह है जिलों की फाइल चुनावी वर्ष में ही खुलती है।राजनीतिक दल इस मामले को चुनावी साल में लॉलीपॉप के रूप में उपयोग करते हैं। इस बार भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। करीब चार माह पूर्व इस बात का खुलासा हो चुका था कि चार जिलों की संस्तुति हुई है। मगर, तब सीएम ने धन का रोना रोकर इस मामले में पानी डाल दिया।

दरअसल, अभी तक प्रदेश को जिला बनाने की क्षमता वाला मुख्यमंत्री नहीं मिला। अभी तक प्रदेश के आठों मुख्यमंत्री तहसील स्तरीय ही साबित हुए हैं। यही वजह है कि सबने मिलकर तहसीलों का शतक बना डाला। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां ब्लॉकों से ज्यादा तहसील हैं। एक ब्लॉक में दो-तीन तहसील तक शामिल हैं।

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