जिलों की मांग को शांत करने को ब्लॉकों का शिगूफा

जिलों की मांग को शांत करने को ब्लॉकों का शिगूफा

Blockप्रदेश में जिलों की मांग को शांत करने के लिए नए ब्लॉकों का शिगूफा छोड़ दिया गया है। इस मामले में बड़ी चतुराई से गेंद केंद्र के पाले में डाली जा रही है।

मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक बनने के लिए राज्य मिला तो नेता इससे छोटी इकाइयों का विस्तार करना भूल गए। ये बात अलग है कि विकास की गति के लिए नेता अक्सर छोटी प्रशासनिक इकाइयों का राग अलापते रहते हैं। परिणाम आज भी प्रदेश में 13 ही जिले हैं।

तहसील यहां ब्लॉक से अधिक हो गई हैं। ब्लॉक की संख्या 95 किसी भी लिहाज से कम नहीं है। जिलों की संख्या निश्चित रूप से कम है। 2011 में चार नए जिलों की घोषणा हुई। मगर, पांच साल बाद भी उनका कहीं अता पता नहीं है।

इसको लेकर कांग्रेस और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। सच्चाई ये है कि इस मामले में दोनों का रवैया एक जैसा है। जब जो सत्ता में होता है वो जिलों के मामले को लटकता है। चुनावी साल में जरूर ये मामले बाहर निकल आते हैं।

अब तो एक और नया खेल शुरू हो गया। जिलों की मांग का दबाब बढ़ा तो सरकार ने बड़ी चालाकी से नए ब्लॉकों का शिगूफा छोड़ दिया। ताकि जिलों की मांग को और छोटे स्तर पर बांट दिया जाए। इस शिगूफे को भी प्रदेश सरकार बड़ी चालाकी से केंद्र की ओर सरकाना चाहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

एसपी खाली होंगे संस्कृत शिक्षा विभाग के निदेशक

देहरादून। मंडलीय अपर निदेशक ( बेसिक शिक्षा) एसपी