भाजपाइयों को भी चाहिए चेहरा

भाजपाइयों को भी चाहिए चेहरा

bjp-candidateभाजपा कार्यकर्ताओं को भी एक चेहरा चाहिए। जिसको आगे कर 2017 के चुनाव में पार्टी के लिए वोट मांगा जा सकें। इस प्रकार के फीडबैक पार्टी हाईकमान तक पहुंच रहे हैं।

उत्तराखंड में 2017 का चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जाएगा अभी तक भाजपा तय नहीं कर सकी है। जबकि कांग्रेस पहले ही मुख्यमंत्री हरीश रावत को चेहरा तय कर चुकी है। ऐसे में अब पार्टी कार्यकर्ता भी चुनाव से पहले चेहरे का ऐलान चाहते हैं।

अभी तक पार्टी हाईकमान इससे बच रहा था। कारण कहीं न कहीं पार्टी आलाकमान को इससे बैक फैयर का आंशका है। इसकी तमाम वजह पार्टी के जानकार गिनाते रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेता इसके पक्ष में तमाम तर्क गढ़ रहे हैं।

तर्क दिया जा रहा है कि चेहरा तय करना जरूरी नहीं है। कमल निशान पार्टी का असली चेहरा है। ये तर्क देते हुए पार्टी के नेता भूल जाते हैं कि केंद्र की सरकार एक चेहरे की वजह से बन सकी है।

बहरहाल, पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल रहे फीडबैक के बाद अब प्रदेश में चेहरा तय करने के बारे में हाईकमान के स्तर से भी सोचा जाने लगा है। कार्यकर्ताओं के स्तर से लगातार ऐसे चेहरे के ऐलान की बात हो रही है जो पार्टी को जीत दिला सके।

जिसके नाम पर आवाम को भरोसा दिलाया जा सकें। प्रदेश के पूर्व के चुनाव में की गई इस प्रकार की एक्सरसाइज पार्टी के लिए लाभ का सौदा रही है। बहरहाल, कार्यकर्ताओं के स्तर से आ रहे इस प्रकार के फीडबैक के बाद पार्टी में इन दिनों चार नामों पर मंथन चल रहा है। लाभ-हानि, गुण-दोष तमाम समीकरणों को जांचा और परखा जा रहा है।

साथ ही इस संबंध में पार्टी की प्रदेश इकाई से लेकर हाईकमान अपने स्तर से भी सूचनाएं जुटा रहा है। माना जा रहा है कि तमाम बातों से संतुष्ट होने के बाद संभव है कि पार्टी 2017 के चुनाव के लिए चेहरे का ऐलान कर दें।

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