आयुष की कामना के साथ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव शुरू

आयुष की कामना के साथ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव शुरू

yog-feस्वस्थ जीवन और खुशहाली की कामना के साथ 29 वां अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव शुरू हो गया। 93 देशों के योग साधक और पर्यटक इसके गवाह बनें।

योग की अंतर्राष्ट्रीय राजधानी ऋषिकेश में बुधवार को उत्तराखंड के राज्यपाल डा. केके पाल ने 29 वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारंभ किया। आयुष मंत्रालय- भारत सरकार, उŸाराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड, गढ़वाल मण्डल विकास निगम और परमार्थ निकेतन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सप्ताह व्यापी महोत्सव में 93 देशों के एक हजार से अधिक योग साधक शिरकत कर रहे हैं।

इस अवसर पर उŸाराखण्ड के महामहिम राज्यपाल श्री कृष्णकांत पाल ने अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में आये सभी प्रतिभागियों एवं योगाचार्यो का उŸाराखण्ड की धरती पर स्वागत किया। उन्होंने परमार्थ निकेतन के प्रयासों की सराहना की। साथ ही कहा कि वास्तव में योग स्वयं का जानने का माध्यम है।

उत्तराखंड के पर्यटन सचिव शैलेश बगोली ने देश विदेश से आए योग साधकों और पर्यटकों को जोरदार स्वागत किया।  राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्रीमती इवा आशीष श्रीवास्तव ने सभी का आभार प्रकट किया।

अन्तरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सभी प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुये कहा, ’इस दिव्य क्षेत्र में सभी प्रतिभागियों, योगाचार्यो, अतिथियों का भाव भरा अभिनन्दन है।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने सभी पूज्य संतों, योगाचार्यो एवं अतिथियों के साथ मिलकर उद्घाटन समारोह के पश्चात माननीय राज्यपाल श्री कृष्ण कान्त जी को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। इस मौके पर जिलाधिकारी चंद्र शेखर भट्ट, जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक अतुल कुमार गुप्ता, महाप्रबंधक बीएल राणा आदि मौजूद थे।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की प्रथम सुबह की शुरूआत प्रातः 4 बजे कैलिफोर्निया अमेरिका से आये सुखमन्दिर सिंह खालसा द्वारा कुण्डलिनी योग के अभ्यास के साथ हुयी। तत्पश्चात पेन्सिलवानिया अमेरिका से आयी एरिका काफॅमैन द्वारा लीला योग, डॉ फरजाना सिराज द्वारा योग थेरेपी का समकालीन औषधि के रूप में उपयोग एवं साध्वी आभा सरस्वती जी द्वारा पारम्परिक हठ योग का अभ्यास कराया गया। अमेरिका से आयी आनन्द्रा जार्ज द्वारा ब्रह्ममूहूर्त में ध्यान के दौरान मंत्रो का मधुर वाचन किया गया।

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