आरक्षण पर भाजपा क्या करें और क्या न करें की स्थिति में

आरक्षण पर भाजपा क्या करें और क्या न करें की स्थिति में

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देहरादून। प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। सरकार क्या करें और क्या न करें की स्थिति में है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण के मामले में दो टूक निर्णय दिया है कि ये संवैधानिक अधिकार नहीं है। यानि प्रमोशन में आरक्षण राज्य सरकार पर निर्भर है। इस निर्णय को आए 15 दिनों से अधिक हो गया है। मगर, त्रिवेंद्र सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकी हैं।

सरकार इसको लेकर भाजपा संगठन के मुंह पर ताक रही है। संगठन के स्तर से भी इस मामले को लटकाने के प्रयास हो रहे हैं। कोशिश हो रही है कि इससे बड़ा कोई मुददा प्लाट किया जाए। ताकि आरक्षण मुक्त प्रमोशन का मामला दब जाए।

इस दिशा में प्रयास भी होने लगे हैं। गैरसैंण को शीतकालीन राजधानी बनाने की उछाली जा रही बात को ऐसा ही माना जा रहा है। हालांकि इससे खास लाभ शायद ही भाजपा को। इस मामले में कांग्रेस भी दुविधा में दिख रही है।

कांग्रेस सभी कर्मचारियों के साथ होने की बात कर रही है। जबकि उसका केंद्रीय नेतृत्व को कुछ और ही स्टैंड है। क्षेत्रीय राजनीतिक दल यूकेडी खुलकर आरक्षण के विरोध में है।

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