राज्य की परिस्थितियों के मुताबिक हो क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट

राज्य की परिस्थितियों के मुताबिक हो क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट

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ऋषिकेश। क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट में राज्य की परिस्थितियों और जरूरतों का ध्यान रखा जाए। केंद्र के स्तर पारित सीईए को हुबहू राज्य में लागू करने से आम आदमी प्रभावित होगा।

ये कहना इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की स्थानीय इकाई के पदाधिकारियां का। सोमवार को ऋषिकेश प्रेस क्लब में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट की तमाम खामियों को मीडिया के सम्मुख रखा।

कहा एक्ट के कुछ बिंदु ऐसे हैं जिससे चिकित्सकों को अपने क्लीनिक/ नर्सिंग होम बंद करने को मजबूर होना पड़ेगा। कारण इसकी शर्तों को फॉलो करना मुमकिन नहीं है। मेडिकल व्यवसाय पर इंस्पेक्टर राज हावी हो जाएगा।

इसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ेगा। कारण ईलाज महंगा हो जाएगा। आईएमए ने राज्य सरकार से मांग की कि एक्ट में राज्य की परिस्थितियों को समाहित किया जाए। एक्ट में का डा्रफ्ट फाइनल करने से पहले आईएमए से जुड़े चिकित्सकों को विश्वास में लिया जाए।

एक सवाल के जवाब में एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. हरिओम प्रसाद ने कहा कि आईएमए इस बारे में कई बार शासन से अनुरोध कर चुका है। मगर, अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। कहा कि ऐसे में चिकित्सकों के सम्मुख आंदोलन ही एक मात्र विकल्प रह जाता है। 15 सितंबर से इसकी शुरूआत की जाएगी।

इस मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. हरिओम प्रसाद, सचिव डा. यूएस खरोला, उपाध्यक्ष डा. राजेंद्र गर्ग, कोषाध्यक्ष डा. अमित अग्रवाल, डा. हरीश द्विवेदी, डा. नरेंद्र रतूड़ी, डा. बीएम सोनी, डा. विजय जोशी, डा. वीके पुरी, डा.डीपी रतूड़ी, डा. एसडी उनियाल आदि मौजूद थे।

 

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