ब्रह्माण्ड में हर जगह फैले हैं रेडियोएक्टिव कणः डा. प्रदीप नारायण

ब्रह्माण्ड में हर जगह फैले हैं रेडियोएक्टिव कणः डा. प्रदीप नारायण

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ऋषिकश। ब्रह्माण्ड में कोई भी जगह नहीं है, जहाँ रेडियोएक्टिव कण न पाये जाते हो। कहीं ज्यादा और कहीं कम होते है। सभी प्रकार के विकिरण हानिकारक नहीं होते। कुछ लाभदायक भी होते है और स्वास्थ्य लाभ में सहायक होते है।

ये कहना है डीआरडीओ लैब जोधपुर के वैज्ञानिक डा. प्रदीप नारायण का। डा. नारायण श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के ऋषिकेश परिसर के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा ‘रेडियोएक्टिविटी एवं मानवता’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने रेडियोएक्टिव पदार्थ के सिद्धान्त व इतिहास के बारे में चर्चा करते हुए व्याख्यान प्रारंभ किया।

बताया कि इस ब्रह्माण्ड में कोई भी जगह नहीं है, जहाँ रेडियोएक्टिव कण न पाये जाते हो। कहीं ज्यादा और कहीं कम होते है। सभी प्रकार के विकिरण हानिकारक नहीं होते। कुछ लाभदायक भी होते है और स्वास्थ्य लाभ में सहायक होते है।

रेडियोएक्टिव विकिरण के मुख्य स्रोत है-ब्रह्माण्ड निर्माण के समय, कॉस्मिक किरणों का हल्के कणों से प्रभाव एवं मानव जनित क्रियाओं द्वारा उन्होंने न्यूक्लियर रिएक्टर, परमाणु बम, हाइड्रोजन बम के सिद्धान्त पर चर्चा की।

ऐडियोएक्टिव के मानवता हेतु उपयोग जैसे स्वास्थ्य, कृषि, इंडस्ट्री, हाइड्रोलॉजी, डाग्नासिस, शोध, कैरियर डायग्नोसिस, इमेजिंग, खाद्य पदार्थ संरक्षण प्रायः उपयोग में आने वाले रेडियोएक्टिव आइकोटोप के मेडिकल गामा कैमरा, थायराइड न्यूक्लियर मेडिसिन, पॉजिट्रान एमिशन टोमोग्राफी, रेडिएशन थेरेपी गामा नाइफ, इंसेक्ट पेस्ट कन्ट्रोल, क्रॉप म्यूटेशन गामा इरेडिएशन प्लान्ट, टेस्टिंग ऑफ एयरक्रॉफ्ट इंजिन, रेडियो कॉर्बन डेटिंग, स्मॉक डिटेक्टर, फायर एलार्म, रेडियोएक्टिव स्टडी विज्ञान के क्षेत्र में भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान के सभी विद्यार्थियों को अपना कैरियर बना सकते है।

इससे पूर्व प्राचार्य डॉ. एन.पी. माहेश्वरी, डॉ0 प्रदीप नारायण, वैज्ञानिक डी0आर0डी0ओ0 लैब, जोधपुर एवं भौतिक विज्ञान की विभागाध्यक्षा प्रोफेसर सुमिता श्रीवास्तव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। डॉ. प्रदीप नारायण का स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ. माहेश्वरी जी ने कहा कि छात्र-छात्राओं के उत्थान एवं विकास के लिए ऐसे महत्वपूर्ण व्याख्यान अत्यंत आवश्यक है।

व्याख्यान के अंत में प्रोफेसर सुमिता श्रीवास्तव ने प्राचार्य, मुख्य वक्ता एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दयाधर दीक्षित ने किया। डॉ. सुषमा गुप्ता, डॉ. जीके घींगरा, डॉ. मुक्तिनाथ यादव, डॉ. इन्दु तिवारी, डॉ. हेमन्त परमार, डॉ. आरए सिंह, डॉ. अंजू सेमवाल, डॉ. टीएस खाती, डॉ.सविता वर्मा, डॉ. श्वेता एवं श्रीमती मंजू चौहान आदि मौजूद थे।

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