गंगा और यमुना को वैधानिक व्यक्ति का दर्जा

गंगा और यमुना को वैधानिक व्यक्ति का दर्जा

gangaगंगा और यमुना को क्षति पहुंचाने को किसी इंसान को क्षति पहुंचाने जैसा माना जाएगा। यानि आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धराओं के तहत मुकदमा दर्ज होगा।

उक्त ऐतिहासिक निर्णय नैनीताल हाईकोर्ट ने दिया। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक सिंह और न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंडपीठ ने उक्त निर्णय दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में गंगा और यमुना का वैधानिक दर्जा दिया है।

इस दर्जे के बाद दोनों नदियों को क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमा दर्जा होगा। इसकी पैरवी तीन सदस्यीय समिति करेगी। इसमें उत्तराखंड के मुख्य सचिव, हाईकोर्ट के मुख्य अधिवक्ता और नमामी गंगे प्राधिकरण के महानिदेशक शामिल होंगे।

उल्लेखनीय है कि न्यूजीलैंड की वांगनुई को जीवित व्यक्ति के रूप् में दर्जा दिया गया है। इसके अलावा कोर्ट ने गंगा नदी से निकलने वाली नहरों आदि पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों का बंटवारा आठ सप्ताह के भीतर करने को निर्देशित किया है।

राज्यों के स्तर से निर्देशों का अनुपालन न होने पर कोर्ट से सुप्रीम पावर का उपयोग करने को कहा गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

मेयर अनीता ममगाईं के प्रयासों की उत्तराखंड भर में हो रही सराहना

ऋषिकेश। एम्स में उत्तराखंड के लोगों के लिए