प्रसन्नता दिवसः सुखी रहो और सुखी रखो

प्रसन्नता दिवसः सुखी रहो और सुखी रखो

happyविश्व प्रसन्नता दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन आश्रम में वैश्विक एवं पर्यावरणीय खुशी को बढ़ावा देने के लिये अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इस मौके पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष  स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वैश्विक परिवार को दिये संदेश में कहा कि ’सदियों की इबादत से बेहतर है ओ लम्हा जो तूने बिताया है किसी इन्सान की खिद्मत में।

ये जो खिद्मत है, ये जो सेवा है, ये ही सच्चा आनन्द प्रदान करती है। वो सचमुच सच्चा आनन्द है; भीतर का आनन्द है और उसके साथ हम ध्यान करे, ध्यान के साथ साथ जो हमारे आसपास बिखरी हुयी मानवता है उसका भी ध्यान करें, उससे हमें आनन्द भी मिलेगा; मोक्ष भी मिलेगा; प्रभू भी मिलेंगे और साथ में मिलेगा प्रसाद भी प्रसन्नता का। उन्होने कहा कि ’सुखी रहो और सुखी रखो’ ये जीवन में प्रसन्न रहने का सार। यह छोटा सा मंत्र बहुत बड़ा काम करता है इससे आप आनन्द रस में डूबे रहेंगे, मस्त रहेंगे, स्वस्थ रहेंगे।’
इस अवसर पर जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ’परमार्थ गंगा तट पर होने वाली पावन गंगा आरती खुशी का वह घण्टा है जो हमें चारां पहर प्रसन्न रखता है। भारत की संस्कृति हमें खुश रहना ही नहीं बल्कि आनन्द और आनन्द से परमानन्द की यात्रा कराती है और परमानन्द की प्राप्ति सेवा से होती है। सेवा कार्य विश्व कल्याण के लिये हो; मानव कल्याण के लिये हो; प्रभु की भक्ति के लिये हो।
गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के पाचंवे दिन परमार्थ गंगा आरती के पश्चात चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित सभी साधकों को ’हैप्पी प्लानेट हैप्पी पीपल’ का संकल्प कराया।

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