मुख्यमंत्री पर कैसे भरोसा करें तीर्थ पुरोहित ?

मुख्यमंत्री पर कैसे भरोसा करें तीर्थ पुरोहित ?

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देहरादून। बहुमत के दम पर चार जिलों के मंदिरों पर श्राइन एक्ट लागू करवाने वाली भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आश्वासन पर तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी भरोसा करेंगे? शायद नहीं। इसकी तमाम वजह हैं।

राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद देवस्थानम विधेयक एक्ट की शक्ल ले चुका है। राज्य के श्री बदरीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री गंगोत्री, श्री यमुनोत्री समेत 51 मंदिर अब श्राइन एक्ट के दायरे में होंगे। यानि मंदिरों की व्यवस्था एक्ट के तहत गठित होने वाले बोर्ड के अधीन होंगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारियों को भरोसा दिला रहे हैं कि उनके हित-दस्तूर बनें रहेंगे। परंपरा यथावथ रहेंगी। सीएम की इस बात पर तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारियों के लिए हाल फिलहाल भरोसा करना मुश्किल हो रहा है।

इसकी तमाम वजह हैं। इसमें विधेयक को विधानसभा में रखने से पहले इस पर सरकार ने तीर्थ पुरोहित हक हकूधारियों के साथ प्रॉपर चर्चा नहीं की गई। शंकाओं को दूर करने का प्रयास नहीं किया गया। सवाल उठाने पर बहुमत की बात कही गई।

इसके अलावा राज्य के 13 जिलों में सिर्फ चार जिलों में स्थित मंदिरों में ही श्राइन एक्ट क्यों? उन मंदिरों को क्यों छोड़ा गया जिनके अधिग्रहण की संस्तुति जिला प्रशासन और जिला पंचायत तक कर चुकी है। क्या श्राइन एक्ट के बगैर सरकार धामों की बेहतरी को काम नहीं कर सकती थी।

इसके अलावा भाजपा के भीतर भी एक्ट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ये बात अलग है कि मौजूदा समय कुछ बोलने का नहीं है।

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