भाजपा के अधिकांश जिलाध्यक्ष नहीं हो सकेंगे रिपीट

भाजपा के अधिकांश जिलाध्यक्ष नहीं हो सकेंगे रिपीट

Kamal (3)

टिहरी। भाजपा के निर्वतमान अधिकांश जिलाध्यक्षों के रिपीट होने की संभावना ना के बराबर रह गई है। कारण मेरिट, राजनीतिक समीकरण में बहुत कम फिट बैठ पा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड भाजपा जिलों के संगठन की ओवरहॉलिंग कर रही है। इसके लिए सभी जिला इकाइयों को भंग कर दिया गया है। 23 में से जिलों की संख्या 14 कर दी गई है। कहा जा सकता है कि भाजपा में जिलाध्यक्ष बनने की प्रतिस्पर्द्धा कठिन हो गई है।

14 जिलों में अधिकांश की कमान निर्वतमान जिलाध्यक्षों को शायद ही मिले। कहा जा रहा है कि अधिकांश जिलाध्यक्ष रिपीट नहीं होंगे। उनके स्थान नए और इनरजेटिक चेहरों को मौका मिलेगा। इसके संकेत भी पार्टी के स्तर से मिलने लगे हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के इशारे पर हो रहे इस परिवर्तन में अब राज्य के नेता भी अपनी पसंद के जिलाध्यक्ष के लिए दखल देने की स्थिति में नहीं होंगे। यानि सिफारिश से जिलाध्यक्ष बनने का क्रम भाजपा में थमने जा रहा है।

पार्टी की इस नई व्यवस्था से राजनीतिक आकाओं की कृपा से जिलाध्यक्ष बने नेता इससे परेशान हैं। कारण मेरिट और राजनीतिक समीकरण पर उक्त जिलाध्यक्ष फिट नहीं बैठ रहे हैं। इसके अलावा कुछ जिलाध्यक्षों को लेकर शिकायतें भी रही हैं।

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