मामला तबादले काः बेसिक और जूनियर के शिक्षक ही क्यों ?

मामला तबादले काः बेसिक और जूनियर के शिक्षक ही क्यों ?

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देहरादून। कांग्रेस शासन में हुए शिक्षक/कर्मचारियों के तबादलों में सिर्फ बेसिक और जूनियर के तबादलों को निरस्त करने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस शासन के अंतिम दिनों में शिक्षा विभाग ही नहीं दर्जनों विभागों में अधिकारी/कर्मचारियों के जमकर तबादले हुए। 2017 में भाजपा सत्ता में आई तो सबसे पहले कांग्रेस शासन में हुए पांच सौ से अधिक बेसिक/जूनियर के शिक्षकों के तबादलों को रडार पर ले लिया।

करीब तीन साल बाद आखिरकार शासन ने इन्हें निरस्त कर शिक्षकों को मूल विद्यालय में जाने का फरमान सुना दिया है। हालांकि अभी फरमान पर विभागीय कार्रवाई चल रही है। इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर अन्य शिक्षकों के साथ अन्य विभागों के अधिकारी/कर्मचारियों के तबादलांं का संज्ञान क्यों नहीं लिया गया।

प्रभावित शिक्षक जनप्रतिनिधियों के सम्मुख इस मामले को रख रहे हैं। तमाम जनप्रतिनिधि इस बात को प्रदश शासन के साथ ही शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों को बता चुके हैं। इस मामले का ताजा सूरतेहाल ये है कि शासन अपने निर्णय पर अडिग है और अधिकारियों पर इसे धरातले पर उतारने का दबाव है।

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