यूनिवर्सिटी में मोतीबाग का प्रदर्शन, छात्रों से रूबरू हुए निर्देशक

यूनिवर्सिटी में मोतीबाग का प्रदर्शन, छात्रों से रूबरू हुए निर्देशक

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श्रीनगर ( गढ़वाल)। ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई निर्मल चंद्र डंडरियाल निर्देशित लघु फिल्म मोती बाग का विश्वविद्यालय के कला एवं निष्पादन केंद्र चौरास में प्रदर्शन किया गया। हर किसी ने फिल्म की विषय वस्तु को सराहा। इस मौके पर निर्देशक छात्रों से रूबरू हुए और अपने अनुभव साझा किए।

राजनीति विज्ञान विभाग एवं उमंग के संयुक्त तत्वाधान में निर्मल चंद्र डंडरियाल के निर्देशन में बनी लघु फिल्म “मोती बाग“ का गुरूवार को प्रदर्शन किया गया। फिल्म पौड़ी जिले के कल्जीखाल ब्लॉक के सगुड़ा गांव के 83 वर्षीय किसान विद्या दत्त शर्मा के बनाए “मोती बाग’’ की कहानी है।

फिल्म में उत्तराखंड की कृषि, बागवानी, जल संरक्षण, श्रम साधना, पलायन, खेती से लोगों के अलगाव जैसे सवालों को दिखाया गया है। फिल्म में सवालों को ही नहीं बल्कि समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत किया गया है।

फिल्म के निर्देशक निर्मल चंद डंडरियाल छात्रों से रूबरू हुए। उन्होंने छात्रों के सवालों के जवाब दिए। फिल्म बनाने की यात्रा व संघर्ष को छात्रों के सम्मुख रखा उन्होंने कहा कि अगर श्रम व इच्छाशक्ति हो तो किसान गरीब नहीं बल्कि विद्या दत्त शर्मा जैसे आत्मनिर्भर व दूसरों को रोजगार देने वाले बन सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ऑस्कर के लिए चुने जाने की प्रक्रिया को भी छात्रों के सम्मुख रखा।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एमएम सेमवाल ने कहा कि उत्तराखंड का सबसे बड़ा सवाल पलायन का है जो कि सरकारों के कारगर एवं दीर्घकालीन नीतियां न बनाने के कारण पैदा हुआ है।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर आर सी रमोला ने कहा कि यह फिल्म पहाड़ के रोजमर्रा के जीवन का वास्तविक चित्रण है जो कि हमारी यादें ताजा करती है। इस फिल्म को बनाते समय निर्देशक ने पहाड़ के जीवन की वास्तविकता को जीवंत रखा है।

प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि गढ़वाल के लोगों में आधुनिकता के दौर में श्रम करने की कमी देखने को मिल रही है जोकि विद्या दत्त शर्मा के चरित्र से सीखने की जरूरत है। अपने इतिहास को समझने की जरूरत इस समय अधिक हो गई है ताकि हम अपने पूर्वजों के संघर्षों से सीख ले सके।

इस कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा शिवानी पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठाता कल्याण प्रोफेसर पीएस राणा,प्रो हिमांशु बौड़ाई, इंजीनियर महेश डोभाल, डॉ सर्वेश उनियाल, मोहन नैथानी, प्रोफेसर बी पी नैथानी, पूर्व कुलपति प्रो सी एम शर्मा, एस के गुप्ता, डॉ संजय पांडे, डॉ कुलीन जोशी, डॉ पूजा सकलानी, डॉ आलोक सागर गौतम व विभिन्न संकायों के छात्र छात्राएं मौजूद रहे।

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