अलग-अलग राग की आशंका से भाजपा परेशान

अलग-अलग राग की आशंका से भाजपा परेशान

kamalकेंद्र और राज्य में सरकार चला रही भाजपा में उत्तराखंड में अलग-अलग राग की आशंका से परेशान है। यही वजह है कि पार्टी संगठन कार्यकर्ताओं को नेताओं को लगातार नसीहत दे रहा है।

उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत का दबाव सरकार और संगठन पर कई तरह से देखा और महसूस किया जा सकता है। ये बात अलग है कि पार्टी के नेता ऑल इज वेल का राग अलाप रहे हैं। दबाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी संगठन जनता और सरकार के बीच सेतु के काम के बजाए कार्यकर्ताओं को नसीहत देता दिख रहा है।

15 दिनों में ही राज्य में कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण से लेकर राष्ट्रीय महामंत्री डा. अनिल जैन बड़ी बैठकें ले चुके हैं। प्रशिक्षण में भी कार्यकर्ताओं और नेताओं को नसीहत दी गई। पार्टी के कार्यों को आगे बढ़ाने को ही ध्येय बनाने पर जोर दिया गया।

अब पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को नसीहत दे रही है कि स्वरों में किसी भी स्तर पर भिन्नता न हो। गिले-शिकवे पार्टी के मंच पर सुने और देखे जाएंगे। पार्टी और सरकार के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी कतई नहीं होनी चाहिए।

यही नहीं कार्यकर्ताओं से विधायकों का सम्मान और विधायकों से कार्यकर्ताओं का मान ध्यान रखने को कहा गया है। इससे सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा को उत्तराखंड में कार्यकर्ताओं और नेताओं के स्तर से अलग-अलग राग की कोई आशंका है।

हाल के दिनों में आला नेताओं के रूठने की खबरें भी रही हैं। सार्वजनिक तौर पर भी ऐसा देखा गया। संभवतः इससे मिले फीडबैक से पार्टी उत्तराखंड को लेकर परेशान है। पार्टी नहीं चाहती कि 2013 के निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के साथ ही 2019 के आम चुनाव तक किसी प्रकार का मनमुटाव पार्टी में दिखे।

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