उत्तराखंड को निर्णयों में तेजी की दरकार

उत्तराखंड को निर्णयों में तेजी की दरकार

yogi&-Trivendrउत्तराखंड को निर्णयों में तेजी की जरूरत है। ठीक वैसे ही जैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ले रहे हैं। ताकि मंद पड़ विकास की गति तेज हो सकें।

दो दिन बाद प्रदेश सरकार एक महीने की हो जाएगी। पहले महीने सरकार अभिनंदन मोड में रही। मंत्रियों ने विभागीय अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया और राज्य गठन के समय से हो रहे दावों को दोहराया। इस दौरान धरातल पर कुछ होता नहीं दिख रहा है।

कुछ मंत्रियों के बयानों में अतिवाद भी दिखा। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा किया गया। एनएच मुआवजा घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश भी हुए। चर्चित अधिकारी मृत्युंजय मिश्र को मिल रही तवज्जो से सवाल भी उठ रहे हैं।

इसको लेकर सचिवालय कर्मचारी संघ आंदोलन की चेतावनी दे चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले का गरमाना तय है। जूनियर अधिकारियों को बड़े पदों पर बिठाने में सरकार की किरकिरी हो चुकी है। सरकार निर्णय भी बदल चुकी है। बावजूद इसके अभी भी कमियों की ओर इशारे हो रही हैं।

बहरहाल, राजकाज के इन मामलों को जरूरत के नाम पर छोड़ दिया जाए तो सरकार के निर्णयों में अभी तक आशातीत तेजी नहीं दिख रही है। प्रचंड बहुमत भी सरकार के लिए उत्प्रेरक का काम नहीं कर पा रहा है। इसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिणाम मशीनरी का अंदाजा अभी भी पूर्ववर्ती सरकार का ही है।

सचिवालय से लेकर तहसीलों तक में ऐसा देखा जा सकता है। सीधे जनता से जुड़े विभागों का तो और बुरा हाल है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से प्रदेश के लोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जैसी तेजी की अपेक्षा रख रहे हैं। हालांकि ये भी सच है कि दोनों प्रदेशों की जरूरत और राजनीतिक तासिर एकदम से भिन्न है। बावजूद इसके यूपी के मुख्यमंत्री का काम करने का अंदाज को लोग उत्तराखंड में भी देखना चाहते हैं।

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