सत्ता की लड़ाई में हाशिए पर उत्तराखंड

सत्ता की लड़ाई में हाशिए पर उत्तराखंड

- in देहरादून, राजनीति
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Congress&-BJPप्रदेश की सत्ता के लिए कांग्रेस और भाजपा के बीच छिड़ी जंग में पर्वतीय राज्य उत्तराखंड हाशिए पर पहुंच गया है।

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद लोगों में जगी उम्मीदें अब नाउम्मीदों में तब्दील होने लगी है। अपने राज्य का उत्साह अब ठंडा पड़ने लगा है। लोगों के मुंह से सुनाई देने लगा है कि इससे अच्छा उत्तर प्रदेश में था। ऐसा सोचने वालों की संख्या और अधिक है।

दरअसल, ऐसा राष्ट्रीय राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा की सत्ता की भूख की वजह से हो रहा है। दोनों दल 16 सालों से उत्तराखंड में सिर्फ और सिर्फ सत्ता की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के हित हाशिए पर पहुंच गए हैं।

16 सालों में दोनों दलों की सरकार ऐसा कुछ नहीं कर सकें जो राज्य में उम्मीदें जगाता हो। जिन सवालों को लेकर अलग राज्य की मांग हुई। लाठी गोली खाकर लोगों ने राज्य लिया उन्हीं सवालों से सरकारें मुंह मोड़ती रही हैं।

इसके बदले दोनों दलों ने भ्रष्टाचार को चुनावी मुददा बना लिया। इस मुददे के सहारे भाजपा ने 2007 का मैदान जीता तो कांग्रेस ने 2012 का। अब 2017 के चुनाव में भी राज्य के सवालों के बजाए भ्रष्टाचार का मुददा ही हावी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ नकली हो हल्ले और तेवरों के नीचे राज्य के ज्वलंत मुददों की सांसें उखड़ रही हैं। लोग उक्त दलों को कोस भी रहे हैं। मगर, विकल्पहीनता का लाभ उक्त दो दलों को ही मिलता रहा है। ऐसा ही कुछ इन दिनों भी दिख रहा है।

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