राजधानी दून में भी गूंजा एम्स से निष्कासित कर्मियों का मामला

राजधानी दून में भी गूंजा एम्स से निष्कासित कर्मियों का मामला

- in देहरादून
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देहरादून। एम्स से निष्कासित कर्मियों का मामला अब राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून में भी गूंजने लगा है। तमाम सामाजिक और आंदोलनकारी संगठनों ने इस पर तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं।

ऋषिकेश में 32 दिनो ंसे चल रहे एम्स से निष्कासित कर्मियों का आंदोलन/ आमरण अनशन की हो रही अनदेखी अब पूरे राज्य में नाराजगी का रूप लेनी लगी है। बुधवार को कर्मी अपनी पीड़ा लेकर प्रेस क्लब में मीडिया से रूबरू हुए।

विभिन्न सामाजिक और आंदोलनकारी संगठनों के पदाधिकारी भी उक्त युवाओं के साथ थे। इस मौके पर सभी ने एक स्वर से एम्स प्रशासन पेर राज्य के युवाओं के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। कहा कि पांच-छह साल से काम कर रहे उत्तराखंड के युवाओं को नौकरी से निकाला जा रहा है और बाहर के लोगों को लगाया जा रहा है।

एम्स प्रशासन नौकरी से निकालने में सामान्य पक्रिया तक को फॉलो नहीं कर रहा है। निष्कासित कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। राज्य के कुछ रसूखदार नेताओं की भूमिका को लेकर भी युवाओं ने सवाल खड़े किए।

पत्रकार वार्ता के बाद युवा गैरसैंण अभियान मंच पर पहुंचे और सहयोग मांगा। इस मौकेपर छात्र नेता सचिन थपलियाल, उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार, राज्य आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, गैरसैंण अभियान के मनोज ध्यानी, लुसुन टोडरिया, गिरीश सिंह, कमल कांत, विवेक भंडारी, महर राणा, वीरेश चौधरी, मनीषा, सोनिया, सरिता, ममता रानी, पूनम, अशोक कुमार, अजीत गैरोला, मनदीप, मोनिका, ज्योति आदि मौजूद थे।

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