बाल साहित्य सृजन से पहले बच्चों का मनोविज्ञान समझना जरूरीः डा नागेश पांडे संजय

बाल साहित्य सृजन से पहले बच्चों का मनोविज्ञान समझना जरूरीः डा नागेश पांडे संजय

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अल्मोड़ा। बाल साहित्य सृजन से पहले बच्चों के मनौविज्ञान को समझना जरूरी है। ताकि बाल साहित्य की विषय वस्तु बेहतर और अद्यतन तैयार किया जा सकें। अब बच्चों की साहित्य को समझने और उसका मूल्यांकन करने की अच्छी समझ विकसित हो रही है।

ये कहना है राजेंद्र प्रसाद पीजी काॅलेज, बरेली के डीन एजुकेशन डा. नागेश पांडेय संजय का। डा. पांडे बालप्रहरी पत्रिका की 17 वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘बच्चे,बालसाहित्य और बालप्रहरी’ विषय पर बालप्रहरी एवं बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा आयोजित 165 वे वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।

डा. पांडे ने कहा कि बालसाहित्य जहां बच्चों का मनोरंजन करता है। बच्चों को मानवीय मूल्यों तथा सामाजिक सरोकारों से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि बालसाहित्य लिखने से पहले बच्चों के मनोविज्ञान को समझना होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बालप्रहरी द्वारा आयोजित ऑनलाइन कार्यशालाओं में बच्चे बाल कविता , बाल कहानी आदि विधाओं पर अपनी समझ बना रहे हैं।

बच्चे कहानी एवं कविता पर अपनी समीक्षा कर रहे हैं। ये उल्लेखनीय कार्य बालप्रहरी द्वारा किया जा रहा है। विज्ञान लेखक डॉ. जाकिर अली ‘रजनीश’ ने राष्ट्रीय स्तर पर बालसाहित्य अकादमी गठन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बालसाहित्य समीक्षा पर और अधिक काम करने की जरूरत है।

उन्होंने बच्चों के लिए तार्किक एवं वैज्ञानिक सोच आधारित बालसाहित्य लिखे जाने की बात कही। एम.बी.पी.जी.कालेज हल्द्वानी की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभा पंत ने कहा कि आज जबकि देश की प्रतिष्ठित बाल पत्रिकाएं बंद हो रही हैं ऐसे में बालप्रहरी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि बालप्रहरी के प्रत्येक अंक में लगभग 100 बच्चे प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ते हैं। बालप्रहरी बच्चों में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास भी कर रही है।

उत्तराखंड शिक्षा विभाग के उप निदेशक आकाश सारस्वत ने कहा कि बालप्रहरी की ऑनलाइन कार्यशाला में जहां बच्चे साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़ रहे हैं। वहीं कविता,त्वरित भाषण, आत्मकथा, पत्र लेखन तथा साक्षात्कार आदि विधाओं के माध्यम से कोरोना, पर्यावरण आदि पर जागरूकता कार्यक्रम भी चल रहा है।

बालप्रहरी के संरक्षक सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त एवं साहित्यकार श्याम पलट पांडेय ने कहा कि ऑनलाइन कार्यशाला में बच्चे जहां अलग-अलग विषयों पर अपने विचार रख रहे हैं वहीं उन्हें अभिव्यक्ति के लिए बतौर वक्ता,अध्यक्ष, मुख्य अतिथि तथा संचालक अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। अतिथियों का स्वागत करते हुए बालप्रहरी के संपादक एवं बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के सचिव उदय किरौला ने कहा कि वर्तमान में लगभग 480 बच्चे बालप्रहरी परिवार से जुड़े हैं।
जिनमें लगभग 200 बच्चे सक्रिय तौर पर जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक लगभग 145 बच्चों को संचालन करने का अवसर मिला है। समूचे कार्यक्रम का संचालन राजकीय इंटर कालेज धूमाकोट की कक्षा 8 की छात्रा पूर्वांशी ध्यानी ने किया। सभी वक्ताओं ने पूर्वांशी के संचालन की सराहना की।

इस अवसर पर कई साहित्यकार,शिक्षक तथा अभिभावकों ने ऑनलाइन कार्यक्रम में सहभागिता की। हस्तलिखित पत्रिका से ई पत्रिका तक बालप्रहरी का सफर’ विषय पर समानान्तर चली कार्यशाला में मुख्य अतिथि साहित्यकार गंभीरसिंह पालनी, अध्यक्षता करते हुए पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी ओ.पी.हर्बोला, शिक्षाविद् के.पी.एस.अधिकारी, अनिल चैधरी, रमेश चंद्र पंत तथा जे.पी.तिवारी ‘कंटरमैन’ आदि ने बालप्रहरी के प्रयासों की सराहना की।

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