ऐसे होते हैं आदिधाम बदरीनाथ के कपाट बंद

ऐसे होते हैं आदिधाम बदरीनाथ के कपाट बंद

श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर स्थित गणेश जी के कपाट बंद होने के साथ आदिधाम बदरीनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

उल्लेखनीय है कि 19 नवंबर को शाम सात बजकर 28 मिनट पर बदरीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। इसकी प्रक्रिया बुधवार को गणेश पूजन के साथ शुरू हो गई। 16 नवंबर को आदि केदारेश्वर के कपाट बंद होंगे।

17 नवंबर को खडग पुस्तक बंद, 19 नवंबर को लक्ष्मी जी को न्योता, 19 नवंबर को प्रातःकाल भगवान श्री बदरी विशाल का फूलों से श्रृंगार, रावल जी का विशेष रूप धारण कर लक्ष्मी जी को भगवान बदरीनाथ मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा। इसके बाद शाम सात बजकर 28 मिनट पर शीतकाल के लिए कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

इसी क्रम में श्री कुबेर एवं उधव जी की डोल व आदि गुरू शंकराचार्य की गददी गरूड़ मंदिर से बाहर आ जाते हैं। 20 नवंबर को कुबेर एवं उधव की भव्य शोभा यात्रा पांडुकेश्वर पहुंचेगी। 21 को आदिगुरू शंकराचार्य की गददी जोशीमठ पहुंचेगी।

शीतकाल में योग ध्यान मंदिर पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर जोशीमठ में भगवान बदरीनाथ की शीतकालीन पूजाएं नियमित रूप से शुरू हो जाएंगी।

 

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