… और उमड़ पड़ा मुख्यमंत्री का सहारनपुर प्रेम

… और उमड़ पड़ा मुख्यमंत्री का सहारनपुर प्रेम

ऋषिकेश। क्या भाजपा पहाड़ी राज्य उत्तराखंड का भूगोल बदलना चाहती है। क्या गैरसैंण को लेकर उठ रहे आवाज से उसे परेशानी हो रही है।

उक्त सवालों का जवाब शायद हां में है। इसकी पुष्टि हुई सहारनपुर में। मौका था बालाजी धाम के कार्यक्रम का। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंच पर अपने सहारनपुर प्रेम पर खूब कहा। कहा कि वो सहारनपुर को उत्तराखंड में मिलाने के पक्षधर रहे हैं।

यही नहीं उन्होंने इसके लिए प्रयास भी किए। मुख्यमंत्री का सार्वजनिक मंच पर इस बयान के मायने निकाले जा रहे हैं। जानकार भी मानते हैं कि संभलकर बोलने वाले सीएम रावत ने इसे ऐसे ही तो नहीं कहा होगा।

गत दिनों कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने बिजनौर के कुछ गांवों को उत्तराखंड में मिलाने की पैरवी की थी। तब इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं हुई थी। हालांकि भाजपा ने तब भी इस पर कोई रिएक्ट नहीं किया।

बहरहाल, पहले कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत और फिर स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयानों से लगता है कि भाजपा पहाड़ी राज्य उत्तराखंड का भूगोल बदलना चाहती है। भाजपा ऐसा कर पहाड़ पर राजनीतिक निर्भरता को समाप्त करने के साथ ही मैदानी क्षेत्र में वाहवाही लूटना चाहती है।

गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी बनाने को उठ रही मांग से भाजपा असहज महसूस कर रही है। सहारनपुर और बिजनौर की पैरवी कर भाजपा एक झटके में पहाड़ी राज्य को मैदान में उतार देगी।

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