संविधान दिवस की प्रासंगिकता पर एक नजर

संविधान दिवस की प्रासंगिकता पर एक नजर

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डॉ राखी पंचोला।
भारत गणराज्य का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ था और संविधान सभा द्वारा इसको स्वीकार किया गया था। संविधान सभा की प्रारुप समिति के अध्यक्ष डॉ भीमराव अम्बेडकर की 125 जयंती वर्ष के रुप में 26 नवम्बर 2015 से संविधान दिवस मनाया जाता है।

भारतीय संविधान की मूल प्रति हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हस्तलिखित है। इसमें टाइपिंग या प्रिंट का प्रयोग नहीं किया गया है।दोनों ही भाशाओं में संविधान की मूल प्रति को प्रेम नारायण रायजादा ने लिखा था। रायजादा का खानदानी पेशा कैलिग्राफी का था अतः संविधान कैलिग्राफी में लिखा गया है। भारतीय संविधान के चित्रों को आचार्य नंदलाल बोस ने सजाया है तथा प्रस्तावना पेज को सजाने का काम राममनोहर सिन्हा ने किया है। संविधान की मूल प्रति भारतीय संसद की लाइब्रेरी में हिलियम से भरे केस में रखी गयी है।

आजादी के बाद भारत में परिवर्तन और पुनर्निर्माण का नया दौर शुरु हुआ। हिन्दुस्तान की परम्परा,पाश्चात्य विचारधारा और राष्ट्रीय पुनरुद्धार की भावना की परस्पर प्रतिक्रिया से परिवर्तन का जो दौर शुरु हुआ उसने भारतीय समाज की नींव को आघात पहुंचाए बिना उसे एक नयी दिषा दी। एशिया और अफ्रीका के नये स्वतंत्र देश को अपना संविधान बनाने और उसे अमली रुप देने में बहुत कठिनाई हुई किन्तु भारत में ऐसी कोई कठिनाई नहीं हुई।

भारत ने से 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में संविधान बना लिया गया। संविधान के आधार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं का लंबा चौडा ढांचा भी खडा कर दिया गया जो अब तक काम कर रहा है। रजनी कोठारी भारत में राजनीति नामक पुस्तक में लिखते हैं कि भारतीय संविधान की सफलता का कारण यह है कि मूल बातों पर स्वतंत्रता के पहले की पीढी एकमत थी और स्वतंत्रता के बाद की पीढी में भी इन्हीं विचारों को मान्यता मिली।

जब भारत ने संविधान को अपनाया तब भारत के नागरिकों ने शांति, शिष्टता और प्रगति के साथ संवैधानिक, वैज्ञानिक स्वराज्य और आधुनिक भारत में प्रवेश किया था। संविधान के निर्माण में हर वर्ग का सहयोग लिया गया। ऐसे लोग भी संविधान सभा में थे जिनका कांग्रेस से कभी संबध नहीं था ।जैसे डॉ सर्वपल्ली राधाकृश्णन और गोपालस्वामी आयंगर। कांग्रेस के विरोधी भी संविधान सभा में थे। जैसे जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी और डॉ भीमराव अम्बेडकर।
अल्पसंख्यक कमेटी में पी0के0 साल्वे (ईसाई)रुपनाथ ब्रह्म(आदिम जाति) एमवीएच कालिंस (एंग्लोइंडियन) और एम0रत्नस्वामी। मुस्लिम लीग के टिकट पर चुने गये तीन सदस्य भी इस कमेटी में लिए गये।

संविधान दिवस भारतीय संविधान के महत्व को समझाने के लिए ही प्रत्येक वर्श 26 नवम्बर के दिन मनाया जाता है। सब भारतीयों को यह समझाने का ध्येय है कि संविधान देश की तरक्की के लिए अति महत्वपूर्ण है तथा भारत जैसे विभिन्न सम्प्रदायों, भाषाओं,जातियों व संस्कृतियों वाले समाज को संविधान के द्वारा ही एकता के सूत्र में पिरोया जा सकता है।

दर्जनों भाषा सैकडों विधि, हजारों विधान हैं
जो जोडकर सबको साथ रखे वो भारत का संविधान है।

इसप्रकार कहा जा सकता है कि संविधान दिवस मनाने का उद्धेश्य नागरिकों को संविधान के प्रति सचेत करना तथा समाज में संविधान के महत्व का प्रसार करना है।संविधान भारतीयता की भावना से सृजित विश्वास है जिसको किसी दायरे में बांॅधा नहीं जा सकता है अतः सभी सेविधान को समझें तथा उसके प्रति निश्ठावान रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका प्रदान करें।
लेखक गवर्नमेंट कॉलेज में एसोसियेट प्रोफेसर हैं।

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