शिक्षक संघः बनने लगे हैं अलग-अलग मंच

शिक्षक संघः बनने लगे हैं अलग-अलग मंच

govt-teache-assoराजकीय शिक्षकों संघ में धीरे-धीरे बोल कोई सुनना ले की तर्ज पर अलग-अलग मंच बनने लगे हैं। ये बात अलग है कि संघ के पदाधिकारी ये मानने को तैयार नहीं हैं।

राजकीय शिक्षक संघ यानि प्रदेश के हाईस्कूल और इंटर कालेजों में तैनात शिक्षकों का संगठन। पिछले कुछेक सालों में संगठन शिक्षकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह मांगों और समस्याओं की विभिन्नताएं हैं।

इन विभिन्नताओं में उपलब्ध इंटरलिंकेज को संगठन एकीकृत टास्क का रूप नहीं दे सका है। परिणाम एलटी शिक्षकों को अपने साथ अन्याय होता दिख रहा है तो प्रवक्ताओं की चिंता कुछ और है। महिला शिक्षिकाओं के मुददे सीसीएल और मातृत्व आवकाश तक ही सीमित रह गए।

जबकि सभी कैडर में जायज मांगों की भरमार है। बावजूद संगठन इस पर प्रॉपर तरीके से रिएक्ट नहीं कर पा रहा है। राज्य गठन के बाद से ही संगठन में ये कमी दिख रही है। परिणाम सरकार संगठन को खास गंभीरता से नहीं लेती।

यही वजह है कि अब राजकीय शिक्षक संघ में धीरे-धीरे बोल कोई सुनना ले की तर्ज पर अलग-अलग मंच बनने लगे हैं। ये बात अलग है कि उक्त मंचों को सजाने वाले ऐस मानने को तैयार नहीं हैं।

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