सामाजिक सरोकारों की निर्भिक प्रहरी हैं डा. मधु थपलियाल

सामाजिक सरोकारों की निर्भिक प्रहरी हैं डा. मधु थपलियाल

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डा. मधु थपलियाल बहुआयामी प्रतिभा की धनी हैं। वो एक प्रयोगशील पहाड़ी हैं। समाज के हर मुददे पर बेबाकी से राय रखती हैं। उनका सुधारवादी दृष्टिकोण उन्हें खास पहचान दिलाता है। हाल ही में उन्होंने यूकॉस्क की डिजिटल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस बहाने उनसे उच्च शिक्षा, राज्य, राजनीति, समाज और तमाम मुददों पर बातचीत हुई। पेश है हिन्दी न्यूज पोर्टल www.tirthchetna.com  से बातचीत।

सवाल-यूकॉस्ट की डिजिटल प्रतियोगिता में आपने प्रथम स्थान प्राप्त किया। बधाई, कैसे लग रहा है।

जवाब- थैंक्स। बहुत अच्छा लग रहा है। इस उम्र में प्रतियोगिता जीतना उत्साह पैदा करता है। बचपन जैसी खुशी हो रही है। लिखने का प्रयास बचपन से करती रही हूं। प्रकृति, आस-पास की बातें उन्हें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं। हालांकि संकलित कभी नहीं किया।

सवाल-आप बहुत छोटी उम्र में राजनीति में भी रही हैं। चुनाव भी जीता और अब शिक्षा के मोर्चे पर हैं।

जवाब- जी, मै 23 साल की आयु में उत्तरकाशी जिला पंचायत की सदस्य चुनी गई। दरअसल, मेरा लालन पालन राजनीतिक परिवार में हुआ है। पिता कॉमरेड कमलाराम नौटियाल जन नेता थे। इनकलाब जिंदाबाद सुनकर ही मै बड़ी हुई हूं। घर में राजनीति का माहौल था। संघर्ष का गुण आनुवंशिक है। अन्याय होते नहीं देख सकती। अभी भी ऐसे ही हूं। बदलूंगी नहीं।

सवाल-आप हायर एजुकेशन में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर हैं। अच्छी नौकरी है। फिर भी आप दुसरों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ उठ खड़ी होती हैं।

जवाब- मैने कहा ना, अन्याय नहीं देख सकती। जितना संभव होता है मदद करती हूं। लोगों को संघर्ष के लिए प्रेरित करती हूं। नौकरी रोजी रोटी है। हम समाज के प्रति अपने दायित्वों से नहीं बच सकते। शिक्षक की जिम्मेदारी तो बड़ी होती है। ये जिम्मेदारी क्लास में कोर्स पढ़ाने तक सीमित नहीं है। हम पर देश के लिए अच्छे नागरिक बनाने का जिम्मा है।

सवाल- आप उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी सक्रिय रही।

जवाब-जी, मुझे ये सौभाग्य प्राप्त हुआ है। पिता कॉमरेड कमलाराम नौटियाल अलग राज्य के विचार के सूत्रपात के दिन से आंदोलन में शामिल थे। घर का पूरा माहौल राज्य आंदोलन के इर्द-गिर्द रहता था। दो अक्तूबर 1994 की दिल्ली के रामलीला मैदान की रैली में शामिल रही। रामलीला मैदान में जो कुछ हुआ उसे अपनी आंखों से देखा। बहुत सी यादें हैं।

सवाल- महिला मुददों पर भी आप सक्रिय रही हैं। लोकल बॉडी चुनाव में कन्या भ्रूण हत्या, महिला सुरक्षा को अपने मुददा बना दिया था।

जवाब- देखिए ये समाज का मुददा है। यदि कहीं पर महिलाओं की उपेक्षा हो रही है या वो असुरक्षित महसूस कर रही हैं तो समाज आगे नहीं बढ़ सकता। इस अन्याय के खिलाफ हर किसी को बोलना-सोचाना चाहिए।

सवाल- राज्य बनने से पहले का उत्तराखंड और राज्य बनने के बाद के उत्तराखंड में क्या अंतर महसूस करती हैं। क्या-क्या अंतर दिखता है।

जवाब- जमीन आसमान का अंतर है। यूपी में उत्तराखंड राज्य सपना होता था। अब उत्तराखंड राज्य हकीकत है। 20 सालों में अक्सर क्या खोया-क्या पाया पर चर्चाएं होती रहती हैं। तब मतभेद की राजनीति होती थी अब मन भेद हो गए हैं। इससे समाज प्रभावित होता है। ऐसा दिख भी रहा है।

सवाल- राज्य के युवाओं के बारे में क्या सोचती हैं।

जवाब- उत्तराखंड के युवा संभावनाओं से भरपूर हैं। वो योग्य हैं। जब-जब मौका मिला उन्होंने हर मोर्चे पर स्वयं को साबित किया है। राज्य में उनके टैलेंट का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके लिए ठोस व्यवस्था बनाने की जरूरत है।

सवाल- आप शिक्षिका हैं, राजनीतिज्ञ हैं, समाज सेवी हैं आपको क्या कहें। युवाओं के लिए आपका कोई संदेश।

जवाब-जितनी उपमाएं हैं सबका उददेश्य समाज की बेहतरी से है। युवा समाज की बेहतरी के लिए आगे आएं।

1 Comment

  1. Vikram S, Rawat

    मैं भी अन्याय के विरुद्ध। पत्रकार विक्रम रावत
    9324258029 उत्तराखंड। रीठाखाल।

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