व्यर्थ न गंवाएं प्राण ऊर्जा को

व्यर्थ न गंवाएं प्राण ऊर्जा को

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ऋषिकेश। जीवन के तमाम अवयवों का संचालन करने वाली प्राण ऊर्जा को  व्यर्थ नगंवाएं। ध्यान के माध्यम से इसकी बैंकिंग करे।

देखने, सुनने, बोलने और विचार करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। इस ऊर्जा को प्राण ऊर्जा कहा जाता है। जीवन के तमाम अवयवां का संचालन इसी प्राण ऊर्जा से संभव होता है। ऐसे में प्राण ऊर्जा की फिजुलखर्ची न करें।

एक स्वस्थ मनुष्य में 80 प्रतिशत प्राण ऊर्जा आंखों से खर्च होती है। 10 प्रतिशत हाथों से और 10 प्रतिशत पैरों से बाहर निकलती है। पिरामिड स्पिरिच्युल सोसाइटी मूवमेंट इस दिशा में काम कर रही है। सालों के शोध के बाद ये स्थापित हो चुका है कि प्राण ऊर्जा का संरक्षण संभव है।

यानि इसकी बैंकिंग की जा सकती है। माध्यम है ध्यान। हाथ-पैर क्रास कर जब हम आंखें बंद कर ध्यान करते हैं तो प्राण ऊर्जा की शत प्रतिशत बैंकिंग होती है। बस ध्यान रहे मुंह में मौन और मन में शून्य हो। इसी को ध्यान कहा जाता है।

पिरामिड स्पिरिच्युल सोसाइटी मूवमेंट इसके लिए निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहा है। तीर्थनगरी ऋषिकेश में गोविंद नगर स्थित इंटरनेशनल पिरामिड मेडिटेशन सेंटर इसके लिए काम कर रहा है।

 

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