हाईकोर्ट का सरकार से सवाल, क्यों नहीं हटा ऋषिकेश का अतिक्रमण

हाईकोर्ट का सरकार से सवाल, क्यों नहीं हटा ऋषिकेश का अतिक्रमण

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ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश के अतिक्रमण से संबंधित जनहित याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सरकार को दिए गए निर्देशों पर धरातलीय अमल न होने से इस मामले में अवमानना वाद दायर हो गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव समेत सात पक्षकारों को तीन सप्ताह के भीतर इस पर पक्ष रखने को कहा है।

उल्लेखनीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार गुप्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर होईकोर्ट ने अगस्त 2018 में राज्य सरकार को तीर्थनगरी ऋषिकेश में सरकारी भूमि, फुटपाथ, अवैध कब्जों को मुक्त कराने हेतु निर्देशित किया था।

हाईकोर्ट के इस आदेश को सभी सात पक्षकारों इसमें मुख्य सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, लोनिवि, राजमार्ग खंड, एचडीए, और नगर निगम को सर्व किया गया था। इसके बाद भी ऋषिकेश का अतिक्रमण ज्यों का त्यों बना है

इस पर गुप्ता ने अवमानना वाद दायर किया। इस पर हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर इस संबंध में पक्ष रखने को कहा है। गुप्ता ने बुधवार को पूरे मामले को मीडिया के सम्मुख रखा। कहा कि जिन अतिक्रमणों की सूची समय-समय पर संबंधित विभागों को सौंपी जाती रही उस पर अधिकारी गौर तक नहीं कर रहे हैं।

गुप्ता का कहना है कि अधिकारियों के इस रवैए से अतिक्रमणकारी अब कायदे कानूनों का मुंह चिढ़ाने लगे हैं। कहा कि विभागीय अधिकारियों को अतिक्रमण की जो सूची सौंपी गई थी उसमें किसी पर भी अमल नहीं हुआ।

ऐसे में जनहित और शहर हित के लिए उन्हें अवमानना वाद दायर करना पड़ा। इस मौके पर उन्होंने मीडिया को करीब तीन दर्जन बड़े अतिक्रमणों की सूची मुहैया कराई।

कहा कि अतिक्रमण ने शहर की सूरत को बुरी तरह से बिगाड़ दिया है। लोग परेशान हैं और संबंधित विभाग जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं।

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