विकास और पर्यावरण में सामंजस्य बनाना होगा

विकास और पर्यावरण में सामंजस्य बनाना होगा

- in पौड़ी
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श्रीनगर ( गढ़वाल)। विकास और पर्यावरण में सामंजस्य बनाने की जरूरत है। ताकि आदर्श स्थितियां बनी रही।

चारधाम सड़क परियोजना पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में सप्ताहिक चर्चा में उक्त बात उभरकर सामने आई। बैठक में इन दिनों चल रहे ऑल वेदर रोड पर खास फोकस रहा।

चर्चा में भूगोल विभाग के प्रोफेसर देवी दत्त ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि उक्त परियोजना से पर्यावरण और कृषि भूमि को नुकसान हो रहा है। मगर, इसका दूसरा पहलु सुगम यातायात भी है। ऐसे में सामंजस्य बनाकर आगे बढ़ा जाना चाहिए।

प्रोफेसर सीएस सूद ने कहा कि परियोजना सामरिक दृष्टि से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसे पर्यावरणीय नुकसान से इत्तर देखा जाना चाहिए। साथ ही ये परियोजना राज्य में विकास की गति को बढ़ाएगी। प्रो. आरएन गैरोला ने कहा कि परियोजना पर्यटन, तीर्थाटन को गति देगी और सुगम बनाएगी।

राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एमएम सेमवाल ने कहा कि परियोजना पर व्यापक दृष्टिकोण से समझना होगा। इसे सिर्फ पर्यावरणीय नुकसान के आइने से नहीं देखा जा सकता है। कहा कि परियोजना राज्य की बेहतरी का पैगाम है।

छात्र वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण और विकास में सामंजस्य बनाकर आगे बढ़ा जाना चाहिए। विकास कार्यों में थोड़ी सतर्कता से ऐसा संभव है।

इस मौके पर शोध छात्रा ममता उप्रेती, गौरव डिमरी, पूजा नेगी, निकिता आदि ने विचार रखे। इस मौके पर डा. राकेश नेगी, डा. मनीष मिश्रा, शहजाद चौधरी आदि मौजूद थे।

 

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