वैश्विक महामारी में आईडीपीएल के रिवाइवल की नकली मांग

वैश्विक महामारी में आईडीपीएल के रिवाइवल की नकली मांग

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ऋषिकेश। वैश्विक महामारी कोरोना में जीवन रक्षक दवा निर्माणी, आईडीपीएल के रिवाइवल की नकली मांग शुरू हो गई है। दरअसल, वक्त पर भाजपा और कांग्रेस ने कभी भी रिवाइवल को गंभीरता नहीं दिखाई।

रूस की मदद से बने जीवन रक्षक दवा निर्माणी, आईडीपीएल को डुबोने में राजनीतिक व्यवस्था का बड़ा हाथ रहा है। सत्ताधीशों ने दवा बाजार के खिलाड़ियों के इशारे पर ऐसा किया। जब दवा बाजार के खिलाड़ी सरकार की पहुंच से बाहर हो गए तो गाहे बगाहे सरकार को आईडीपीएल के रिवाइवल की याद आई।

एनडीए सरकार में 1998-99, और यूपीए-1 और दो में दो एक्सपर्ट कमेटी ने ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल के रिवाइवल को लेकर सबल संस्तुति की। मगर, आज दिन तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।

दरअसल, रिवाइवल की फाइल भी बाजार के इशारे पर ही बंद होती रही हैं। सरकारें, राजनीतिक दल और नेता भले ही कुछ भी दावा कर लें सच बात ये है कि आईडीपीएल का डुबाना किसी बड़े पाप से कम नहीं हैं। स्थानीय राजनीति ने कभी इसका संज्ञान नहीं लिया। रिवाइवल को लेकर कभी स्थानीय नेताओं ने आवाज नहीं उठाई।

दो स्थानीय सांसद मुख्यमंत्री रहे, केंद में मंत्री रहे और हैं बावजूद आईडीपीएल के रिवाइवल की बात कभी नहीं हुई। हां, लोकल मीडिया के पूछने पर उक्त नेताओं ने रिवाइवल को लेकर खूब दावे किए। दिल्ली के कुछ अधिकारियों के दौरे करवाए। स्वयं भी आईडीपीएल का दौरा किया।

इन दौरों में आईडीपीएल की जीवन रक्षक दवा के बजाए आईडीपीएल को आवंटित भूमि और इसकी मौजूदा स्थिति पर अधिक चर्चा हुई। अब तो आईडीपीएल की भूमि पर खास लोगों की नजर भी है।

अब वैश्विक महामारी कोरोना के वक्त अचानक आईडीपीएल के रिवाइवल की बात कर वाहवाही लूटी जा रही है। सच ये है कि राज्य गठन के बाद न तो भाजपा ने और न ही कांग्रेस ने कभी आईडीपीएल की सुध ली। ऐसे में दोनां दलों के राज्य स्तरीय नेताओं को रिवाइवाल का स्वांग रचने का भी अधिकार नहीं है।

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