एसडीपीसी गर्ल्स पीजी कॉलेज रूड़की में अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार संपन्न

एसडीपीसी गर्ल्स पीजी कॉलेज रूड़की में अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार संपन्न

- in हरिद्वार
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रूड़की। कोविड-19 से पैदा हुए हालातों ने पर्यावरण पर व्यापक असर डाला है। प्रकृति की व्यवस्थाओं में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप पर अंकुश लगा है।

ये कहना है पर्यावरणविद/शिक्षाविदों का। मौका था एसडीपीसी गर्ल्स पीजी कॉलेज में कोविड-19 का पर्यावरण पर प्रभाव विषय आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार का। कार्यक्रम की शुरूआत वेबीनार की संयोजिका डा. कामना जैन के इसके उददेश्य पर प्रकाश डालने के साथ हुआ।

वेबीनार के मुख्य वक्ता प्रोफेसर बी. डी. जोशी ने अंधानुकरण ने प्रकृति की व्यवस्थाओं पर मानवीय हस्तक्षेप को बढ़ा दिया है। लोग जरूरत के बजाए प्रकृति को लोभ और लालच की नजर से देख रहे हैं। परिणाम पर्यावरण की आदर्श स्थिति तेजी से छीज रही हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड 19 से भूमंडलीकरण की रफ्तार कमजोर पड़ेगी और हम पुनः अपनी संस्कृति और परम्परा की ओर लौटेंगे। स्वस्थ जीवन शैली को अपनाकर ही हम अपनी धरती और पर्यावरण को बचा सकते है।

गुरूकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पी. सी. जोशी कोरोना महामारी के पर्यावरण पर पड़ने वाले विभिन्न सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए हरिद्वार शहर की जलवायु, जंगल और गंगा नदी प्रदूषण के तत्कालीन आँकड़े प्रस्तुत किये, जिसके अनुसार यहां के वातावरण में प्रदूषण की मात्रा कम हुई है।

इसके साथ ही उन्होने कोविड -19 से उपजी बेरोजगारी और पलायन की गंभीर समस्या की ओर अपनी चिन्ता जताते हुए प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करने की अपील की।

डा. देवी प्रसाद उनियाल जैव विविधता और जल की गुणवत्ता पर अपना व्याख्यान दिया । उन्होने पर्यावरण संरक्षण हेतु अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण अंग ग्रीन बोनस को सक्रिय रूप से संचालित करने की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया ।

अंतर्राष्ट्रीय वक्ता डा. नेहा गुप्ता ने विभिन्न प्रमाणिक आंकड़ों जैसे बिग डाटा, डाटा कलेक्शन, गूगल सर्च ट्रेंड इत्यादि माध्यमों से जानकारी देते हुए बताया कि आधुनिक टेक्नोलोजी द्वारा किस प्रकार से कोविड19 से जुड़ी विविध सूचनाओं का विश्लेषण और समाधान किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डा. अर्चना मिश्रा ने वेबीनार में शिरकत करने वाले सभी ऑनलाइन अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज की संगोष्ठी से पर्यावरण चेतना की दिशा में पुनः चिन्तन मनन करने का दृष्टिकोण प्राप्त हुआ है ।

उन्होने बताया कि मनुष्य ने अपनी अतिवादी क्रियाओं से पर्यावरण में असंतुलन पैदा कर दिया है। हमें अपनी विकृतियों को त्याग कर प्रकृति में संतुलन स्थापित करना होगा ।

वेबीनार की संयोजिका डा. कामना जैन ने बताया कार्यक्रम का सफल बताते हुए कहा कि वेबीनार में देश-विदेश के करीब 250 से अधिक पर्यावरणविद/शिक्षाविदों ने शिरकत की।

वेबीनार की कार्ययोजना सुनियोजित करने में डा. अनुपमा गर्ग, डा. अलका आर्य तथा डा. अस्मा सिद्दीक़ी तथा तकनीकी व्यवस्था में श्रीमती अंजलि प्रसाद का विशेष सहयोग रहा।

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