जयंती पर याद किए गए कॉमरेड कमला राम नौटियाल

जयंती पर याद किए गए कॉमरेड कमला राम नौटियाल

- in देहरादून
0

देहरादून। कॉमरेड कमला राम नौटियाल को जयंती पर याद किया गया। इस मौके पर अधिकांश वक्ताओं ने कहा कमला राम नौटियाल होना आसान नहीं है।

कोविड-19 के चलते कमला राम नौटियाल जयंती समारोह वर्चुअल आयोजित किया गया। ऑनलाइन कार्यक्रम में जुटे लोगों से साबित होता है कि कॉमरेड नौटियाल किस स्तर के जन नायक थे। आम आदमी के हक में उनके संघर्षों की दास्तान बहुत बड़ी है।

रविवार को उनकी जयंती के मौके पर उनके संघर्ष, उनके मिजाज, यायावरी, प्रकृति प्रेम, वामपंथ को समर्पण, प्रगतिशील सोच, परंपराओं और आधुनिकता में तालमेल जैसी तमाम सारी बातों को याद किया गया। वैज्ञानिक राष्ट्र और सशक्त राष्ट्र जैसे विषय पर व्याख्यान माला के बीच में कॉमरेड कमलाराम नौटियाल से जुडे़ संस्मरण आते रहे।

सभी ने एक बार फिर महसूस किया कि आसान नहीं है कॉमरेड कमलाराम नौटियाल हो जाना। जन्म और कर्मभूमि उत्तरकाशी में सक्रिय रहकर पूरे पहाड़ की चिंता करने वाले कॉमरेड कमलाराम नौटियाल कई बार नगर पालिका के चेयरमैन रहे। विधानसभा, लोकसभा चुनाव में भागीदारी की। चुनावी पैंतरेबाजी और जोड़ तोड़ के समीकरणों ने उन्हें इन चुनावों में विजयश्री से दूर रखा, लेकिन लोगों का प्यार भरपूर मिला। मजदूर, कमजोर वर्ग का जहां उत्पीड़न हुआ, वहां कॉमरेड कमलाराम नौटियाल खडे़ मिले।

उनके आंदोलनों के आह्वान पर लोगों का हुजूम उमड़ा। लोगों ने उनका साथ दिया, तो उन्होंने विश्वास पर खरा उतरकर दिखाया। यही वजह रही, कि कॉमरेड ने कई बार जेल की यात्रा की, तो सिर से लेकर पांव तक पुलिस के डंडे खाकर चोटिल भी हुए। चुनावी लाभ-ंहानि के लिए कम्युनिस्ट पार्टी से अलग होने कभी कल्पना तक नहीं की। एक पहाड़ से दूसरे पहाड़, एक चोटी से दूसरी चोटी तक पैदल पहुंचे और टै्रकिंग के दीवानों के सामने मिसाल पेश की।

पहाड़ों पर घूमते-ंफिरते हुए भी कम्युनिस्ट पार्टी जिंदाबाद के नारे लिखना नहीं भूले। कई सालों के सार्वजनिक जीवन के बावजूद अपयश की हल्की सी छाया भी कॉमरेड कमलाराम नौटियाल को छू न सकी। उनके निधन के बाद से उनकी जयंती पर उन्हें शानदार तरीके से याद करने का सिलसिला चल निकला है।

2014 से लगातार आयोजन हो रहे हैं और आयोजन में उनकी पैतृक गाजणा पट्टी के लोगों से लेकर देश के तमाम हिस्सों में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले तमाम लोग शामिल होते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रगतिशील मंच के अध्यक्ष आर्किटेक्ट श्रीकृष्ण कुड़ियाल ने बांसुरी वादन के साथ किया। उन्होंने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ महेश कुड़ियाल, अति विशिष्ट अतिथि प्रो फिलिक्स बास्ट, मुख्य वक्ता पंकज नौटियाल और वंदना गोयल और अन्य अतिथियों, प्रतिभागियों का स्वागत किया।

उन्होंने मंच की स्थापना से लेकर अभी तक के सफर पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि मंच की स्थापना कॉमरेड कमलाराम नौटियाल के विचारों को आगे ब-सजय़ाने के लिए की गई है। 2014 से मंच इस दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इस क्रम में विभिन्न क्षेत्रों की तमाम
विभूतियों को मंच की ओर से सम्मान किया गया है। उन्होंने बताया कि कॉमरेड नौटियाल का विजन वैज्ञानिक था।

उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए अपना दृष्टिकोण सामने रखते हुए कई मानचित्र विकसित किए थे। ऐसे मानचित्र, जिन पर राज्य बनने के बाद आज तक कोई काम नहीं हो पाया है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जाने माने न्यूरो सर्जन डॉ महेश कुड़ियाल ने चिकित्सा और विज्ञान के महत्व को समझाया। कहा कि कि विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों को जानना तो जरूरी है ही, लेकिन जब तक हम नए शोध नहीं करेंगे, तब तक उसे सच्चा विज्ञान नहीं कहा जा सकता।

कोविड-ं19 से उपजी स्थितियों का भी जिक्र किया। कहा कि कोरोना काल में सावधानी ही बचाव है। युवा ये कतई न समझें कि वह इससे बचे रहेंगे। स्कूल-ंकॉलेजों के खुलने के संबंध में उन्होंने कहा कि इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा, मगर जीवन का जोखिम उठाना किसी भी लिहाज से समझदारी नहीं है।

उन्होंने विस्तार से प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए और इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय बताए। अति विशिष्ट अतिथि पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फिलिक्स बास्ट ने कहा कि यदि मनुष्य प्रकृति प्रेमी है, तो वह दुनिया का सबसे धनी आदमी है। जो प्रकृति से दूर रहते हैं, वह न तो वैज्ञानिक हो सकते हैं और न ही धनी। अपने संबोधन में उन्होंने अपने पूरे सफर को विज्ञान से जोड़ते हुए कई अहम बातें सामने रखीं।

कहा कि विज्ञान वही है, जिसमें हम खुले दिमाग से जीते हैं। उन्होंने विज्ञान की अहमियत बताने के लिए व्यक्तिगत उदाहरण भी दिए।
उन्होंने बताया कि उनकी मां की नौ हार्ट सर्जरी है,लेकिन विज्ञान के कारण वह जिंदा हैं। विलसन ग्रेट ने हार्ट के लिए मशीन डेवलप की है, जिसने उनकी मां को जिंदगी दी है। वह अपनी मां हाफ डेड, हाफ लाइफ कहते हैं।

उन्होंने कहा कि हर दिमाग को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सोचना जरूरी है। आने वाली पी-सजय़यां यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नहीं सोचेगी, तो एक अच्छे समाज का निर्माण नहीं हो पाएगा। उन्होंने आर्टिकल-ं51 ए की बात भी की जिसमें बुनियादी कर्तव्यों का जिक्र है। उन्होंने प्रतिभागियों को संदेश दिया कि वह जीवन में अपने लक्ष्यों को लेकर एक पिरामिड बना ले और प्राथमिकता तय कर लें।

उन्होंने अपनी अंटार्टिका यात्रा का जिक करते हुए विज्ञान के साथ जुड़ाव और विश्व शांति के लिए बुनियादी बातों की चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पंकज नौटियाल ने कॉमरेड कमलाराम नौटियाल के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बचपन में उत्तरकाशी की गलियों, सड़कों चौराहों पर जनहित में भाषण देते हुए, संघर्ष करते हुए कॉमरेड नौटियाल ही हमेशा दिखाई दिए।

उन्होने कहा कि वह विज्ञान को समर्पित थे। उत्तरकाशी जिले के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र उन्हीं की देन है। इसी का नतीजा है कि आज चिन्यालीसौंड स्थित यह केंद्र लाल चावल का पेटेंट कराने जा रहा है। आने वाले समय में राजमा और सेब को भी पेटेंट कराने की तैयारी है। सीजे गेम्स की वंदना गोयल ने महिला, विज्ञान और उद्यमिता विषय पर अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि सिर्फ प्रयोगशालाओं में की जाने वाली प्रकिया ही विज्ञान नहीं है, बल्कि समाज के लिए किए जाने वाले तमाम कार्य भी इस श्रेणी में शामिल हैं। कार्यक्रम संयोजिका डॉ मधु नौटियाल थपलियाल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के साथ ही अनूप बडोनी, डॉ आशीष थपलियाल, डा कृष्ण कुडियाल, डॉ महेंद्र परमार, डॉ त्रिभुवन चंद्रा, विपिन बनियाल, सुदीप, मंच की संरक्षिका श्रीमती कमला नौटियाल, राजेश नौटियाल, मंजू नौटियाल, तृप्ति गैरोला, प्रेम गैरोला, कर्नल एसएल पैन्यूली का आभार प्रकट किया। व्याख्यानमाला कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से करीब 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

उत्तरकाशी में कोरोना विस्फोट, एक दिन में 66 कोरोना पॉजिटिव

देहरादून। राज्य के उत्तरकाशी जिले में कोरोना का