उत्तराखंड में खंडूड़ी-कोश्यारी दौर समाप्त

उत्तराखंड में खंडूड़ी-कोश्यारी दौर समाप्त

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ऋषिकेश। भाजपा की राजनीति में अखिल भारतीय स्तर पर अटल-अडवाणी दौर की तर्ज पर उत्तराखंड में खंडूड़ी-कोश्यारी का दौर समाप्त हो गया।

उल्लेखनीय है कि जनसंघ से भाजपा बनने के क्रम में अटल-आडवाणी का दौर रहा। इस दौर का अटल रूपी पहिया 2004 से सक्रिय नहीं रहे। गत वर्ष अटल बिहारी वाजपेयी का निधन भी हो गया। लाल कृष्ण आडवाणी राजनीति में लगातार सक्रिय रहे।

2014 में भी वो अपनी परंपरागत गांधीनगर सीट से सांसद चुने गए। इस चुनाव में वो प्रत्याशी के तौर पर नहीं दिखेंगे। 75 साल का पार्टी के फार्मूले की जद में आने से उनकी चुनावी राजनीति से विदाई हो गई। यानि अटल-आडवाणी समाप्त हो गया।

इस दौर में पार्टी के लिए जीवन लगा देने वाले नेताओं की लंबी फेहरिश्त है। मुरली मनोहर जोशी भी इसमें शामिल हैं। उक्त सभी नेता अब पार्टी की राजनीति में हाशिए पर हैं। भारतीय जनता पार्टी में इसे मार्गदर्शन मंडल का नाम दिया गया है।

उक्त नेताओं की रखी बुनियाद पर आज पार्टी देश में छाई हुई है। अधिकांश राज्यों में पार्टी सत्ता में है। केंद्र में एक बार फिर सरकार बनाने को पार्टी आश्वस्त है।
बहरहाल, अटल-आडवाणी की तर्ज पर उत्तराखंड में भी बीसी खंडूड़ी और भगत सिंह कोश्यारी का दौर समाप्त हो गया।

दोनों 75 साल के फार्मूले के चलते चुनावी राजनीति से बाहर हो गए हैं। उक्त दोनों नेताओं की भूमिका अब उत्तराखंड भाजपा में मार्गदर्शन मंडल में होगी।
इसी प्रकार देश के अन्य राज्यों में भी 75 की आयु पार कर चुके पार्टी नेताओं का हाल भी है। ऐसे तमाम नेताओं को पार्टी ने विभिन्न राज्यों का गवर्नर भी बनाया है।

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