पुरोहितों की अपील पर कोटियाल का आमरण अनशन स्थगित

पुरोहितों की अपील पर कोटियाल का आमरण अनशन स्थगित

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देवप्रयाग। तीर्थ पुरोहितों की अपील पर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के अध्यक्ष कृष्ण कांत कोटियाल ने आज से प्रस्तावित आमरण अनशन स्थगित कर दिया।

उल्लेखनीय है कि देवस्थानम बोर्ड और श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ धाम के मास्टर प्लान के विरोध में उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के अध्यक्ष कृष्ण कांत कोटियाल सतयुग के तीर्थ देवप्रयाग में संगम पर शुक्रवार से आमरण अनशन का ऐलान किया था।

शुक्रवार को संगम स्थित धरना स्थल पर आमरण अनशन के लिए पहुंचे कोटियाल को तीर्थ पुरोहितों ने ऐसा करने से रोक दिया। तीर्थ पुरोहितों ने एक स्वर में कहा कि इस पूरे मामले को लीड कर रहे कोटियाल का आमरण अनशन पर बैठना ठीक नहीं है। इससे आंदोलन प्रभावित हो सकता है।

इस मौके पर आंदोलन को लेकर भ्रम फैलाने वालों को भी आड़े हाथ लिया गया। कहा कि धरातलीय कार्य की सोशल मीडिया में हो रही समीक्षा ठीक नहीं है। आंदोलन को लेकर सभी को जिम्मेदारी के साथ ही टिप्पणी करनी चाहिए।

बहरहाल, तीर्थ पुरोहितों की अपील पर कोटियाल ने आमरण अनशन स्थगित कर दिया। इस मौके पर कृष्ण कांत कोटियाल ने कहा कि सरकार बहुमत के दम पर मनमानी कर रही है। देवस्थानम एक्ट पर तीर्थ पुरोहित एवं हक हकूकधारियों के साथ वार्ता तक न करना इस बात का प्रमाण है। उन्होंने सवाल उठाया कि धामों के विकास में अपने कई पीड़ियां खपा देने वाले तीर्थ पुरोहितों से सरकार को क्यों परहेज है।

उन्होंने कहा कि देवस्थानम एक्ट के विरोध को दबाने के लिए सरकार श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धामों में मास्टर प्लान लागू करने की बात कर दहशत फैला रही है। मास्टर प्लान से पहले जनसुनवाई तक नहीं हुई। कहा कि ये एक तरह से तीर्थ पुरोहितों को धामों से बेदखल करने का डर दिखाना जैसा है।

इस मौके पर डा. गिरधर पंडित, पंडा पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट मुकेश प्रयागवाल, सुनील पालीवाल, नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती शुभांगी कोटियाल, माया पंचभैया, अत्रेश ध्यानी, हरीश टोडरिया, उत्तम भटट, मुकेश टोडरिया, आनंद कोटियाल, देवेश बंदोलिया, अंकित बंदोलिया, निर्मल कोटियाल, प्रकाश भटट आदि मौजूद थे।

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1 Comment

  1. रितिक बडोला

    आंदोलन की आड़ लेकर भ्रम की स्थिति खुद ही पैदा की जा रही है । व्यक्तिगत राजनैतिक फ़ायदे के लिए स्वयं ही आमरण अनशन शुरू और खुद ही खतम क्योंकि कोटियाल के इस कदम का तीर्थ पुरोहितों ने कड़ा विरोध किया इसलिए अनशन स्थगित वरना षड्यंत्र तो कुछ और ही था

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