नियमित कुलपति के लिए तरसा कुमाऊँ विश्वविद्यालय

नियमित कुलपति के लिए तरसा कुमाऊँ विश्वविद्यालय

- in नैनीताल
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नैनीताल।उत्तराखंड राज्य का सबसे पुराना विश्वविद्यालय पूर्णकालिक कुलपति के लिए तरस गया है। नियमित कुलपति न होने से विश्वविद्यालय की तमाम व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

वर्ष 1973 में स्थापित कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल के तीन परिसर समेत 50 से अधिक गवर्नमेंट और प्राइवेट इंस्टीयूट में करीब डेढ़ लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। शासन की उपेक्षा से विश्वविद्यालय घोर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

इसकी बड़ी वजह नियमित कुलपति का न होना है। कार्यवाहक कुलपति विश्वविद्यालय कार्यवाहक अंदाज में ही चला रहे हैं। परिणाम विश्वविद्यालय की तमाम व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। ये बात अलग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ऑल इज वेल गुनगुना रहा है।

राष्ट्रीय प्रत्यायन एवं मूल्यांकन परिषद, नैक द्वारा ए श्रेणी घोषित विश्वविद्यालय नियमित कुलपति की नियुक्ति न होने से
विश्वविद्यालय की व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। साथ ही राज्य में उच्च शिक्षा के दावों की पोल भी खुल रही है।

बताया जा रहा है कि नियमित कुलपति के लिए गठित सर्च कमेटी करीब महीने भर पूर्व रिपोर्ट राजभवन को सौंप चुकी है। नियमित कुलपति के नाम के ऐलान में विलंब क्यों हो रहा है इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नियमित कुलपति की नियुक्ति न होने पर उत्तराखंड के जागरूक एवं बुद्धिजीवी वर्ग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मिलने का प्रयास कर रहे हैं। तमाम उन सक्षम मंचों पर दस्तक दी जा रही है जो इस मामले में दखल दे सकते हैं।

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