शायद ही मिले ऋषिकेश को नगर निगम का दर्जा

शायद ही मिले ऋषिकेश को नगर निगम का दर्जा

Rishikeshऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश को नगर निगम का दर्जा शायद ही मिले। इसकी एक नहीं कई वजह हैं।

राज्य गठन के बाद अलग तरीके से ट्रीट होने वाले ऋषिकेश नगर निकाय को लेकर खासे सवाल उठते रहे हैं। सवालों के घेरे में सरकारें रही हैं। इसमें भाजपा भी शामिल है तो कांग्रेस भी। कांग्रेस शासन में पालिका के सीमा विस्तार से शिगूफा छोड़ा गया।

बगैर होमवर्क के जारी शासनादेश पर स्थानीय जानकारों ने ही खूब सवाल खड़े कर दिए। परिणाम नगर विकास मंत्रालय इस दिशा में आगे नहीं बढ़ सका। कांग्रेस शासन के अंतिम दिनों में नगर निगम की बात भी उछली। मगर, हुआ कुछ नहीं।

अब भाजपा सरकार ऋषिकेश को नगर निगम बनाने का दम भर कर रही है। मगर, ये कतई आसान नहीं है। ऐसे ये माना जा रहा है कि ये बात कुछ लोगों को पुचकारने के लिए हो रही है।

सच ये है कि ऋषिकेश के नगर निगम का दर्जा पाने में कई बातें रोड़ा बन सकती हैं। इसमें वन क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल है। आईडीपीएल टाउनशिप का मामला भी है। इसके आलावा निकाय में संपूर्ण ग्राम पंचायत को ही शामिल किया जा सकता है।

इसमें तमाम पेंच हैं। ऋषिकेश ग्राम पंचायत के तकनीकी मामले किसी से छिपे नहीं हैं। इनसे शायद ही सरकार पार पा सकें। बस कांग्रेस शासन में मेयर बनने का सपने को आकार देने वाले खुश हैं।

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