किस काम के हैं ऐसे सांसद/विधायक

किस काम के हैं ऐसे सांसद/विधायक

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देहरादून। श्राइन एक्ट के चपेट में आ रहे चारधाम समेत 51 मंदिरों के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश विधायक/सांसद तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारियों के साथ खड़े होने से कतरा रहे हैं।

केदारनाथ से कांग्रेस के विधायक मनोज रावत को छोड़ दिया जाए तो उक्त क्षेत्रों के किसी भी विधायक और सांसद श्राइन एक्ट का सड़कों पर विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों पक्ष में बोलना तो दूर उनकी सुध तक नहीं ली। इसको लेकर तीर्थ पुरोहितों में खासी नाराजगी है।

पौड़ी, देवप्रयाग, ऋषिकेश, नरेंद्रनगर, श्रीनगर, केदारनाथ, रूद्रप्रयाग, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि विधानसभा क्षेत्रों में तीर्थ पुरोहितों/हक हकूकधारियों की अच्छी खासी संख्या है। केदारनाथ को छोड़ दिया जाए तो सभी क्षेत्रों से भाजपा के विधायक हैं।

केदारनाथ के विधायक मनोज रावत खुलकर तीर्थ पुरोहितों हक हकूकधारियों के पक्ष में आए। उन्होंने सरकार पर संबंधित पक्षों के साथ चर्चा का दबाव बनाया। ये बात अलग है कि बहुमत के चले भाजपा सरकार ने किसी के नहीं सुनी।

बहरहाल, ऐसा हो सकता है कि सरकार द्वारा पारित श्राइन एक्ट पूरे राज्य की सूरत बदलने वाला हो। ये भी हो सकता है तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारियों की आशंका निर्मूल हों। बावजूद इसके किसी वर्ग के साथ जनप्रतिनिधियों का ऐसा व्यहवार को ठीक नहीं ठहराया जा सकता।
सवाल उठ रहा है कि आखिर विधायक/सांसदों तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारियों से बात करने से भी क्यां कतरा रहे हैं। क्या जनप्रतिनिधि जनता से दूर और पार्टी की नजदीक ज्यादा हो गए हैं।

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