विधायक मनोज रावत की भूमिका काबिलेतारीफ

विधायक मनोज रावत की भूमिका काबिलेतारीफ

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देवप्रयाग। केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने चारधाम समेत 51 मंदिरों की परंपरागत व्यवस्थाओं के साथ सरकार द्वारा की जा रही छेड़छाड़ की जोरदार खिलाफत की है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने बहुमत के दम पर राज्य के चारधाम समेत 51 मंदिरों की व्यवस्था के लिए देवस्थानम एक्ट बनाया है। राज्यपाल के हस्ताक्षर होते ही एक्ट लागू हो जाएगा। एक्ट को विधानसभा में रखने से पहले सरकार ने तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों से चर्चा करना तक जरूरी नहीं समझा। इसके विरोध में तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी आंदोलनरत हैं।

बहरहाल, इस सारे प्रकरण में केदारनाथ से कांग्रेस के विधायक मनोज रावत की भूमिका जनपक्षीय रही। भाजपा के तीर्थ पुरोहित प्रभावित क्षेत्रों के विधायक ऐसा सहास नहीं दिखा सकें। जबकि विधायक मनोज रावत ने सड़क से लेकर विधानसभा तक में तीर्थों, तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों की पक्ष मजबूती से रखा। इसके दुष्परिणाम से सरकार को आगाह भी किया।

उनके साथ नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश, उपनेता करण महारा, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी तीर्थ पुरोहित हक हकुकधारियों के दर्द को समझा। तीर्थ पुरोहितों को कुछ और विधायकों से भी उम्मीद थी कि वो उनका पक्ष रखेंगे। मगर, अधिकांश इस मामले में मुंह खोलने से बचे। ये वो विधायक हैं जिनकी विधानसभा में तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों की संख्या ठीक ठाक है।

यही नहीं कुछ तो तीर्थ पुरोहितों को नसीहत तक दे रहे हैं। ऐसे विधायकों के खिलाफ तीर्थ पुरोहितों हक हकूकधारियों में नाराजगी है। ये नाराजगी 2022 में जरूर गुल खिलाएगी।

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