प्रवासियों से बढ़ा उत्तराखंड में कोरोना का खतरा

प्रवासियों से बढ़ा उत्तराखंड में कोरोना का खतरा

- in टिहरी
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डा. दलीप सिंह। 
प्रवासियों की आमद बढ़ने के साथ ही राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। लॉकडाउन-4 के इम्पोज होने के बाद जितने भी कोरोना पॉजिटिव मामले आए हैं उसमें सभी की ट्रेवल हिस्ट्री सामने आ रही है। कोरोना की दहशत ने शांत वादियों को अशांत कर दिया है।

दुनिया के साथ-साथ भारत में भी कोरोना वायरस तेजी से दिन-प्रतिदिन अपने पैर पसार रहा है, जो कि देश की 1 अरब 40 करोड़ जनसंख्या को बचाने के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसकी गम्भीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया गया और फिर 14 अप्रैल 2020 (21 दिन) तक लॉकडाउन करने का फैसला लेना पड़ा, जो आगे बढ़ाकर 3 मई तक के लिए किया गया और अब 17 मई तक के लिए कर दिया गया।

परिस्थितियों को देखते हुए लगता है कि लॉकडाउन की समय-सीमा को अभी और आगे बढाया जा सकता है। कोरोना वायरस की भयाभयता को देखते हुए इसके सिवाय कोई दूसरा उपाय है भी नही। इसके बाद जो विभिन्न राज्यों से प्रवासियों द्वारा पलायन शुरू हो गया है उसने विभिन्न राज्यों के सामने चुनौती खड़ी कर दी हैं जिनमें उत्तराखण्ड राज्य भी शामिल है। सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों में फंसे अपने लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया है, परन्तु इसके दुष्परिणाम क्या होंगे इस पर चिंतन करने की आवश्यकता थी।

उत्तराखण्ड के लिए यह दोहरी चुनौती है एक ओर प्रवासियों के लौटने से जहां पहाड़ में रौनक लौट आई है वहीं बाहर से आये लोगों द्वारा यहां के गांवों में कोरोना न फैले इससे कैसे निपटा जाय इसकी चुनौती है। बाहर से आये प्रवासियों द्वारा गांव तो अवश्य गुलजार हो गये है जिससे बड़े-बुजर्ग खुश भी है कि जिन बच्चों, नाती-पोतों को देखने की आस वह वर्षों से लगाये थे अब जाकर पूरी हुई है।

विभिन्न राज्यों/शहरों से आये लोगों को जब गांव के नजदीक स्कूलों या पंचायत घरों में कोरोनटाइन किया जा रहा है। तो क्या लोग अपने नाते-पोतों या बच्चों को मिलने से अपने कदम रोक पायेंगे, क्योंकि कई गांवों से शिकायतें आ रही है कि लोग गांव में जहां-तहां घूम रहे है। ऐसे में जहां गांवों में अपनों के आने की खुशी है वहीं कोरोना के खतरे को देखते हुए तनाव व गम भी कुछ कम नही है।

सामाजिक दूरी का तो कई जगह ध्यान ही नही रखा जा रहा है, जिससे यदि कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हुआ तो उससे गांव के लोग भी अछूते नही रह सकते हैं। जिस प्रकार राज्य के विभिन्न भागों में कोरोना पॉजिटिक की खबरे सामने आ रही है उससे तो यही लगता है कि पहाड़ भी अब सुरक्षित नही रहे हैं। सरकार भी इसको लेकर दुविधा की स्थिति में है, जहां पलायन ने अपनी दिशा पहाड़ों की ओर मोड कर राज्य से हो रहे पलायन को कुछ समय के लिए रोक दिया है वहीं उनसे अगर यहां कोरोना वायरस फैलता है तो उससे निपटने की चुनौती भी कुछ कम नही होगी और अगर इन लोगों को यही रोकना है तो उनके लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराने होंगे।

सरकार के पास चुनौती और अवसर दोनों ही है पर देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस चुनौती को किस तरह अवसर में बदलती है।

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