साहित्यकार मोहनलाल बाबुलकर नहीं रहे

साहित्यकार मोहनलाल बाबुलकर नहीं रहे

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देवप्रयाग। साहित्यकार मोहनलाल बाबुलकर का निधन हो गया। वो अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए। उनका निधन उत्तराखंड साहित्य जगत की बड़ी क्षति है।

कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे साहित्यकार मोहनलाल बाबुलकर ने रविवार को एम्स, ऋषिकेश में अंतिम सांस ली। उनके निधन से उत्तराखंड साहित्य जगत की बड़ी क्षति हुई है। उनके हरिद्वार के सिटी हॉस्पिटल और एम्स ऋषिकेश में भर्ती रहने के दौरान शासन द्वारा उनकी सुध न लिए जाने से लोगों में नाराजगी है।

सोशल मीडिया में इसको लेकर सरकार की खूब निंदा हो रही है। बहरहाल, टिहरी जिले में बतौर एसडीआई राजकीय सेवा शुरू करने वाले मोहनलाल बाबुलकर इलाहबाद में शिक्षा विभाग के विभिन्न पदों पर रहे। इस दौरान उन्होंने स्कूली शिक्षा के साथ ही औनपचारिक शिक्षा हेतु साहित्य लेखन का काम किया।

इसी दौरान हिन्दी और गढ़वाली में उन्होंने तमाम पुस्तकें लिखी। विभिन्न पुस्तकों की समीक्षा की। उभरते लेखकों के लिए वो उमेशा प्रेरणा के स्रोत रहे। जीवन के अंतिम दिनों तक वो साहित्य की सेवा में लगे रहे। बहरहाल, उनके निधन से गृह क्षेत्र देवप्रयाग में शोक की लहर है।

 

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