… और अब भाजपा में नो चैंपियन

… और अब भाजपा में नो चैंपियन

हरिद्वार। प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा में अब कोई चैंपियन नहीं बनेगा। खानपुर के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के तेवर ढीले कर पार्टी ने बड़े बड़ों को संदेश दे दिया है।

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद संभवतः पहली बार किसी राजनीतिक दल ने गलतबयानी के लिए पार्टी के किसी विधायक को माफी मांगने के लिए मजबूर किया। दरअसल, खानपुर से भाजपा विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने गत दिनों सीधे सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया था।

उन्होंने सरकार के खिलाफ मोर्चा क्या खोला कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई। इस बीच, चैंपियन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भी मिल आए। परिणाम चर्चाएं और तेज हो गई।

इस मुलाकात के बाद पहले-पहल प्रदेश संगठन कुछ बोलने से हिचकिचाने लगा था। हालांकि मुख्यमंत्री रावत चैंपियन को अपना कड़ा रूख सार्वजनिक तौर पर दिखा चुके थे। बहरहाल, हाईकमान से मिले संकेत के संगठन ने भी इस मामले में कड़ा रूख अख्तियार कर लिया।

संगठन ने चैंपियन को नोटिस भेजा तो उनके तेवर ढीले हो गए। उन्होंने स्वयं को पार्टी को सिपाही बताना शुरू कर दिया। नोटिस के जवाब में खेद व्यक्त और भविष्य में ऐसा न करने की बात कहकर एक तरह से पार्टी संगठन के सामने सरेंडर कर दिया।

इस तरह से चैंपियन प्रकरण को पार्टी ने भी समाप्त कर दिया। इस तरह से कहा जा सकता है कि अब भाजपा में कोई नया चैंपियन नहीं बनेगा। साथ ही चैंपियन के बहाने एकजुट हो रहे पार्टी के असंतुष्ट विधायकों और कुछ बड़े नेताओं को भी पार्टी ने इस बहाने संदेश दे दिया है।

साथ ही सांसद निशंक की चाय पार्टी से उठे बंवडर को भी समाप्त कर दिया है। चैंपियन के बहाने पार्टी ये संदेश देने में सफल रही कि चाय की प्याली में कोई राजनीतिक तूफान नहीं उठा था। हालांकि जानकारों की माने तो राजनीति में शिकस्त स्थायी नहीं होती।

ऐसे मौके फिर भी देखने को मिलेंगे। नाराजगी दिखाने के सौ मौके होंगे। फिलहाल निकाय चुनाव और फिर आम चुनाव सामने हैं। भाजपा संगठन को इस पर भी गौर करना होगा।

 

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