भारत की युद्ध नीति स्वार्थ नहीं परमार्थ के लिएः अजीत डोभाल

भारत की युद्ध नीति स्वार्थ नहीं परमार्थ के लिएः अजीत डोभाल

- in ऋषिकेश
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ऋषिकेश। भारत की युद्ध नीति स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि परमार्थ के लिए है। भारत आत्मशक्ति को राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाता है।

ये कहना देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का। डोभाल शनिवार को अपने गांव घीड़ी से लौटने के बाद देर शाम परिवार समेत यहां परमार्थ निकेतन की गंगा आरती में शिरकत कर रहे थे। उन्होंने गंगा के तट से अपने संस्कारों और धर्म को आगे ले जाने वाले ऋषिकुमारों और देशवासियों को सम्बोधित करते हुये कहा कि हम राष्ट्र की सुरक्षा नहीं बल्कि राज्य की सुरक्षा करते है।

राष्ट्र की सुरक्षा तो पूज्य संत करते है। पूज्य संत हमारे राष्ट्र की संस्कृति, संस्कार और आत्मा है। भारत की संस्कृति और संस्कारों का निर्माण पूज्य संतों ने किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का निर्माण आत्मशक्ति से होता है। कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिये स्वामी महत्वपूर्ण योगदान है। स्वामी विवेकानन्द जी और संतों ने हमारे राष्ट्र और राष्ट्रभक्ति को जीवंत बनाये रखा।

डोभाल जी ने कहा कि माँ गंगा हमारी धरोहर है। गंगा तो पहले से ही भारत की पहचान है परन्तु स्वामी जी ने गंगा और भारतीय संस्कृति को एक नयी पहचान दी है। उन्होंने कहा कि हमारी युद्धनीति स्वार्थ के लिये नहीं बल्कि परमार्थ के लिये है।

अजीत डोभाल जी ने साध्वी भगवती सरस्वती जी को हिन्दूधर्म विश्वकोश के 11 खंडों के प्रकाशन के लिये धन्यवाद देते हुये कहा कि इस महागं्रंथ में हिन्दू धर्म और संस्कृति की जो वैज्ञानिक व्याख्या की गयी है वह अद्भुत है।

अष्टमी और नवमी के पावन अवसर पर माँ गंगा के पावन तट पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने महाग्रंथ हिन्दूधर्म विश्वकोश की प्रति डोभाल जी को भेंट स्वरूप प्रदान की। इस अवसर पर श्रीमती अनु डोभाल, पुत्र शौर्य डोभाल और दोनों बेटियाँ भी उपस्थित थी।

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