शिक्षक/कर्मचारियों के पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन ने पकड़ा जोर

शिक्षक/कर्मचारियों के पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन ने पकड़ा जोर

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पौड़ी। शिक्षक/कर्मचारियों के पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। पब्लिक डोमेन तक अच्छे से पहुंच चुके इस मामले को अब विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी लाभ-हानि के तराजू में तौलना शुरू कर दिया है।

सरकार के 2005 के बाद सरकारी सेवा में आए शिक्षक/कर्मचारियों को पेंशन से महरूम करने और नेताओं को पांच साल की विधायकी/सांसदी पर आजीवन पारिवारिक पेंशन देने का माजरा अब जनता भी समझ चुकी है। परिणाम जनता के बीच भी इसकी चर्चा होने लगी है।

इस बीच, पुरानी पेंशन बहाली को चल रहा शिक्षक/कर्मचारियों के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक दलों के नेता 2005 के बाद सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों की संख्या और उनसे जुड़े परिवारों की संख्या गिनने लगे हैं।

कहा जा सकता है कि राजनीतिक दल कर्मचारियों के पेंशन वाले मामले में लाभ-हानि के तराजू से तौलने लगे हैं। इसे अच्छा संकेत माना जा रहा है। हालांकि अभी राजनीतिक दल इस पर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। मगर, अब इस पर राजनीतिक दलों को चुप्पी तोड़नी ही होगी।

हाल फिलहाल स्थिति ये है देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दल ही पुरानी पेंशन की मांग के साथ खड़े हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पेंशन बहाली के प्रबल समर्थक हैं। उत्तराखंड में यूकेडी भी इसका ऐलान कर चुकी है।

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