ऑनलाइन शिक्षा में कक्षा जैसे समान अवसर का तत्व होना जरूरी

ऑनलाइन शिक्षा में कक्षा जैसे समान अवसर का तत्व होना जरूरी

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डा. जितेंद्र सिंह । 
ऑनलाइन शिक्षा की सार्थकता को बढ़ाने और इसे परंपरागत शिक्षा के विकल्प के तौर पर प्रस्तुत करने के लिए जरूरी है कि इसमें प्रत्येक छात्र को समान अवसर देने का तत्व मौजूद हो।

इसमें कोई दो राय नहीं कि वैश्विक महामारी कोरोना के चलते देश भर में इम्पोज लॉकडाउन में ऑनलाइन शिक्षण ने छात्रों की क्लास तक पहुंच बनाई। देश में ऑनलाइन क्लास का इतने व्यापक स्तर पर उपयोग पहली बार हुआ। परिणाम ऑनलाइल शिक्षण को विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है।

लॉकडाउन में स्कूलों की शिक्षक और कॉलेज के प्राध्यापकों ने पृथक व्हाट्सएप ग्रुप, जूम ऐप के माध्यम से, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से, स्काइप ऐप के माध्यम से एवं छात्रों के सवालों का जवाब देने के लिए उनके साथ ऑनलाइन चैट करने के माध्यम से ऑनलाइन का उपयोग कर छात्रों को पढ़ाया।

कोरोना संकट के दौरान वैकल्पिक तौर पर ऑनलाइन शिक्षण कार्य अवश्य एक जरूरत है क्योंकि वर्तमान परिस्थिति एवं समय में ऑनलाइन शिक्षण कार्य को जारी रखना और विद्यार्थियों के मनोबल को बनाए रखने के लिए ऑनलाइन शिक्षण एक अच्छा विकल्प है।

विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए परंपरागत कक्षीय शिक्षा के सहायक के रूप में ऑनलाइन शिक्षण कार्य सर्वाधिक उपयोगी सिद्ध हुआ। मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस विकल्प को प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। बावजूद इसके इसे परंपरागत शिक्षा के विकल्प के तौर पर देखा जाना चाहिए न कि पूरक के रूप में।

दरअसल, पारंपरिक भारतीय शिक्षा प्रणाली आमने-सामने या शारीरिक शिक्षण का अनुसरण करती है। क्योंकि इस प्रकार के शिक्षण कार्य में शिक्षक का आचरण और उसकी क्रियाकलापों का छात्रों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

हालांकि ऑनलाइन शिक्षण को सही मायने में विकल्प बनने में समय लगेगा। कम से कम सुदूर स्थित स्कूल/कॉलेजों में तो ऐसा अनुभव किया गया है। इसको प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है कि इसकी पहुंच प्रत्येक छात्र तक बनें।

उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसे अनेकों महाविद्यालय हैं, जहां इंटरनेट की समस्या आम है। यानि वहां के छात्र ऑनलाइन शिक्षण से प्रॉपर तरीके से नहीं जुड़ पाए। वहां शिक्षकों ने किसी तरह से व्यवस्थाएं की। कई छात्रों के अभिभावकों के पास भी स्मार्टफोन नहीं हैं।

लॉकडाउन में ऑनलाइन शिक्षण में ये बात प्रमुख रूप से उभरकर सामने आ रही है। यही नहीं शिक्षक/प्राध्यापकों को भी ऑनलाइन शिक्षण हेतु वेल इक्विप्ड करना जरूरी है। ताकि वो शिक्षण के इस विकल्प को अच्छे से आत्मसात कर सकें।

इन सब बातों के बावजूद परंपरागत शिक्षा की महत्ता बनी रहेगी। दरअसल, शैक्षिक परिसर में विभिन्न संकाय के छात्रों का आपस में अंतर व्यवहार, बहस, विवेचन एवं तर्क वितर्क व्यक्तित्व के समग्र विकास में बड़ी भूमिका निभाते हैं द्य विभिन्न शिक्षण गतिविधियों एवं अन्य क्रियाकलाप व्यक्तित्व निर्माण को पूर्णतया की ओर ले जाते हैं।

इसलिए ऑनलाइन शिक्षण कार्य पारंपरिक शिक्षा का वर्तमान परिस्थितियों में एकमात्र विकल्प है न कि पूरक।

लेखक गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में अंग्रेजी के प्राध्यापक हैं।

1 Comment

  1. monika agarwal

    Right it’s only a solution on presesnt times it is no replacement for actual teaching research scholar hnbgu.

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