नकली साबित हो रही ऋषिकेश के नेताओं की हुंकार

नकली साबित हो रही ऋषिकेश के नेताओं की हुंकार

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ऋषिकेश। एम्स को बचाने के लिए ऋषिकेश के नेताओं की हुंकार नकली साबित हो रही है। बड़े-बड़े दावे कर नेता अब इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

ऋषिकेश का राजनीतिक ट्रेंड अजीब है। यहां आईडीपीएल के रिवाइवल का वादा सांसद बना देता है। मगर, रिवाइवल नहीं होता। त्रिवेणी घाट का विकास हरकी पैड़ी की तर्ज का वादा चुनाव जीता देता है। मगर, वादा पूरा करने के लिए धरातलीय प्रयास नहीं होते।

गो अनुसंधान केंद्र धनराशि स्वीकृति की बाद निरस्त हो जाता है। मगर, ऋषिकेश में किसी भी राजनीतिक दल का नेता मुंह नहीं खोलता। इस कड़ी में एक और मुददा जुड़ गया। पिछले माह एम्स को बचाने के लिए सभी दलों के नेताओं ने एक मंच पर आकर हुंकार भरी।

सर्वदलीय समिति बनाई। बड़ी-बड़ी बातें कही। मीडिया को भी नसीहत दी। कुछ लाटे पत्रकार भावुक होकर इस मुददे को उत्तराखंड के हित से जोड़ बैठे। नेताओं की बातों में वजन बताने लगे। मगर, नेताओं की हुंकार एक माह में ही पस्त होती दिख रही है।

बातें सामने आ रही हैं कि आंदोलन उठाने वाले नेताओं पर दबाव है। दबाव कहां से और क्यों आया इसको लेकर भी जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं।  अब सवाल उठ रहा है कि क्या नेता एम्स को लेकर जो सवाल उठा रहे थे वो सिर्फ आरोप थे। एम्स के कर्ताधर्ता पर जो आरोप लग रहे थे उनमें कुछ सच्चाई नहीं है।

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