विकास की संभावनाओं के बाद भी सबधारखाल क्षेत्र की उपेक्षा

विकास की संभावनाओं के बाद भी सबधारखाल क्षेत्र की उपेक्षा

- in पौड़ी
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सबधारखाल। विकास की पर्याप्त संभावनाओं के बावजूद सबधारखाल क्षेत्र की शासन स्तर से उपेक्षा हो रही है। इसकी प्रमुख वजह क्षेत्र से राजनीतिक नेतृत्व का न उभरना है।

मंडल मुख्यालय पौड़ी और कुंभनगरी देवप्रयाग के बीचों-बीच स्थित स्थित सबधारखाल करीब पांच दर्जन गांवों का सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्र है। 2001 में देवप्रयाग गंगा पर मोटर पुल बनने के बाद लगा था कि सबधारखाल क्षेत्र का विकास होगा।

यहां मौजूद विकास की संभावनाओं को सरकार तराशेगी। मगर, ऐसा नहीं हुआ। राज्य गठन के बाद सबधारखाल क्षेत्र के हिस्से विधायक/सांसदों की थोड़ी बहुत विधायक निधि आई। इससे भी कुछ चंट चकड़ैतों का ही भला हुआ।

दरअसल, राज्य गठन के बाद पहले श्रीनगर और फिर पौड़ी विधानसभा में शामिल सबधारखाल क्षेत्र को भाजपा और कांग्रेस ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। यही वजह है कि चुनाव जीतने के बाद यहां के विकास की संभावनाओं तक पर विधायकों ने चर्चा नहीं की।

रही सही कसर क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक नेतृत्व के न उभरने से पूरी होकर रह गई। जबकि यहां विकास की पर्याप्त संभावनाएं हैं। देवप्रयाग सबधारखाल, कुंडाधार-सबधारखाल, सबधारखाल-डांडा नागराजा को ट्रेकिंग रूट के रूप में विकसित किया जा सकता है। पर्यटन की स्टे होम योजना की यहां खासी संभावनाएं हैं।

ये क्षेत्र में रोजगार का बड़ा जरिया बन सकता है। मगर, ऐसा करने की नीयत व्यवस्था की दूर-दूर तक नहीं दिख रही है। विकास तो दूर क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। चार दशक पूर्व प्रस्तावित कादेखाल-रामकुंड पेयजल योजना के लिए लोगों को भूख हड़ताल करनी पड़ रही है।

 

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