निर्वाण दिवस पर याद किए गए स्वामी रामतीर्थ

निर्वाण दिवस पर याद किए गए स्वामी रामतीर्थ

- in टिहरी
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नई टिहरी। महान संत स्वामी रामतीर्थ को 114 वें निर्वाण दिवस पर याद किया गया। इस मौके पर उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।

स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीपी ध्यानी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर डा. ध्यानी ने स्वामी रामतीर्थ के व्यक्तिव व कृतित्व के बारे में अवगत कराया और उनके द्वारा किस तरह से पूरी दुनिया में भारतीय दर्षन, भारतीय संस्कृति और वेदों को आचरण में लाने की विद्यावों का प्रचार प्रसार किया गया के बारे में बताया।

उन्हांने स्वामी रामतीर्थ के गढ़वाल भ्रमण के बारे में तथा टिहरी को उनकी तपो भूमि बनने के बारे में भी विस्तृत रूप से बताया। डा0 ध्यानी ने यह भी बताया कि उनके एक उद्वरण/कोट (फनवजम) ने उन्हे कैसे, कार्य द्वारा सफलता प्राप्त करने हेतु, प्रोत्साहित किया।

डा. ध्यानी ने कहा कि सफलता प्राप्ति के लियें सबसे पहले हर व्यक्ति को प्रत्येक दिन अपने द्वारा किये गये कार्या का रा़त्र विश्राम से पहले आत्म चिंतन करना चाहिए कि आज उन्होंने क्या-क्या कार्य किये। आत्म चिंतन करने से मनुश्य को नई दिशा मिलती है और नई रूचि का विकास होता है।

शरीर में उत्साह भी बढता है और सकारात्मक उर्जा का प्रवाह भी, और फिर मनुश्य में दृढ़ इच्छा षक्ति का विकास होता है। इसके बाद सारी मानसिक षक्तियों को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये झुका देना चाहिए। इस तरह, हर व्यक्ति सफलता प्राप्त कर सकता है, और अपने समाज तथा राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान सुनिष्चित कर सकता है।

क्ुलपति डा. ध्यानी द्वारा एसआरटी परिसर के निदेशक एवं शिक्षकों को यह सुझाव भी दिया गया कि उन्हे स्वामी रामतीर्थ जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को और चिरस्थाई बनाने के लिये उनके जीवन दर्शन को पाठ्यक्रमों में शामिल करना चाहिए और उनके जीवन के विभिन्न आयामां को षोध हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए, और हर वर्श विष्वविद्यालय परिसर में ’’स्वामी रामतीर्थ व्याख्यान’’ की शुरूआत करनी चाहिए।

कार्यक्रम का आयोजन स्वामी रामतीर्थ फाउंडेशन तथा एसआरटी परिसर, हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विष्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर परिसर के निदेशक प्रो. एए बोडाई, प्रो. एमएमएस नेगी, डा. केसी पेटवाल, डा. प्रेम बहादुर, प्रो. सुबोध कुमार, प्रो0 डीके शर्मा, डा. लाखी राम डंगवाल, डा. आरबी गोदियाल और ठाकुर भवानी प्रताप सिंह आदि उपस्थिति रहे।

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