शिक्षक दिवसः ऐसा लगता है, पास ही खड़े हैं गुरूजी

शिक्षक दिवसः ऐसा लगता है, पास ही खड़े हैं गुरूजी

- in पौड़ी
0

सुदीप पंचभैया।

सबधारखाल। 12 वीं पास किए ढाई दशक हो गया। अभी भी ऐसा लगता है कि गुरूजी हमारे आस-पास ही खड़े हैं। कभी भी विषय से संबंधित सवाल दाग देंगे। परीक्षा की तैयारियों को परख लेंगे। परफारमेंस के आधार पर पोस्टमार्टम भी कर देंगे।

शिक्षक दिवस पर स्कूल के दिनों के कुछ खास शिक्षकों के चेहरे और उनसे जुड़ी यादें बरबस सामने आ गई। पौड़ी जिले के राजकीय इंटर कालेज, सबधारखाल में तैनात रहे शिक्षकों के आशीर्वाद ने जीवन में आगे बढ़ने के लिए खूब प्रेरित किया।
मै उन भाग्यशाली छात्रां में रहा हूं जिन्हें प्रत्येक शिक्षक का भरपूर स्नेह मिला।

सामान्य बुद्धिलब्धि के बावजूद बेहतर आत्मविश्वास की बड़ी वजह गुरूजनों की प्यार और आशीर्वाद रहा है। आज इन शिक्षकों के साथ के अपने संबंध और अनुभव को साझा करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि गुरू महिमा को शब्द देना मुश्किल हो रहा है।

रमेश चंद्र ध्यानी- गुरूजी अब इस संसार में नहीं हैं। पांचवीं पास कर राजकीय इंटर कालेज, सबधारखाल में कक्षा छह में एडमिशन के समय सबसे पहले पाला गुरूजी से ही पड़ा। गुरूजी रिश्ते में मेरे भांजे थे। मगर, मुझे कभी मामा की फीलिंग नहीं आई। वजह गुरूजी का खास व्यक्तित्व।

दुबला पतला शरीर और छात्र को एकदम से ताड़ने की उनकी क्षमता गजब की थी। हिन्दी/संस्कृत के ज्ञान के भंडार। सामान्य ज्ञान के प्रति मेरी रूचि जगाने में ध्यानी सर का सबसे बड़ा हाथ रहा। नौ वीं में मुझे विज्ञान पढ़ने के लिए भी उन्होंने ही प्रेरित किया।

चंद्रमोहन गैरोला-नाम से ही एक खास चेहरा सामने आ जाता है। लगता है कि गुरूजी अभी सवाल करेंगे। खड़े-खड़े परीक्षा की तैयारी भी टटोल लेंगे। हिन्दी माध्यम के बावजूद मुझ़े कभी यूनिवर्सिटी या किसी अन्य प्लेटफार्म पर अंग्रेजी में कोई दिक्कत नहीं हुई। ऐसा गैरोला सर की वजह से संभव हुआ।

उनका अंग्रेजी पढ़ाने का तरीका गजब का था। उस वक्त सर हमे अंग्रेजी में बात करने के लिए प्रेरित करते थे। प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सर पौड़ी में रह रहे हैं।

महेंद्र सिंह राणा- हायर एजुकेशन के लिए राणा सर ने ही मुझे प्रेरित किया। 12 वीं के बाद एमएससी तक वो मेरी परफारमेंस को फॉलो करते रहे। श्रीनगर यूनिवर्सिटी आकर जानकारी लेते थे। मार्गदर्शन करते थे। पत्रकारिता की बात मैने उनसे कई सालों तक छिपाई। हालांकि उन्हें पता चल गया था।

एक बार पौड़ी में आमना-सामना हुआ तो मै बचकर निकलना चाहता था। गुरूजी ताड़ गए। उन्होंने आवाज देकर रोका तो मुझे घबराहट शुरू हो गई। सामने गया तो उन्होंने कंधे पर हाथ रखकर कहा कि पत्रकारिता भी ठीक है। ईमानदारी से काम करना।

राणा सर वर्तमान में उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग में अधिकारी हैं।

डा. राकेश उनियाल- फिजिक्स प्रवक्ता उनियाल सर के सौम्य व्यवहार से के चलते हर छात्र उनके आस-पास रहना चाहता था। वो छात्र की क्षमताओं को बेहतर तरीके से समझते थे। खरी-खरी बोल भी देते थे। भौतिक विज्ञान की कठिन विषय वस्तु को भी सर सरल तरीके से प्रस्तुत करने में उन्हें महारत हासिल थी।
उनियाल सर वर्तमान में राजकीय इंटर कालेज में प्रिंसिपल हैं।

 

यह भी पढ़ेः गवर्नमेंट पीजी कॉलेज ऋषिकेश की प्रो. सुधा भारद्वाज को प्रिंसिपल ऑफ द इयर अवार्ड

यह भी पढ़ेः डा. मधु थपलियाल टीचर ऑफ़ द इयर पुरस्कार से सम्मानित

यह भी पढ़ेः तीर्थ पुरोहितों ने किया सरकार और देवस्थानम बोर्ड का सामूहिक पिंडदान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

राज्य सभाः पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की राह में रोड़े

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के राज्य सभा