शिक्षकों की वरिष्ठता में हुए घालमेल से बढ़ रहे विवाद

शिक्षकों की वरिष्ठता में हुए घालमेल से बढ़ रहे विवाद

seniप्रदेश के सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों की वरिष्ठता में हुए घालमेल से विवाद बढ़ रहे हैं। इसके निदान में न तो विभागीय अधिकारियों को रूचि है और न सरकार इस पर गौर करने को तैयार है।

राज्य के सरकारी हाईस्कूल और इंटरकालेजों में तैनात शिक्षकों की वरिष्ठता में हर स्तर पर घालमेल है। कुछ शिक्षक इसका खूब लाभ उठा चुके हैं। जबकि अधिकांश प्रभावित हो रहे हैं। वरिष्ठता का घालमेल विभाग के स्तर से हो रहा है।

अधिकारियों का इस मामले में ढुलमूल रवैया शिक्षकों को कोर्ट जाने के लिए मजबूर कर रहा है। राज्य गठन के बाद उम्मीद थी कि शिक्षा विभाग इस पर गौर करेगा। मगर, ऐसा नहीं हुआ। तदर्थ और मौलिक पदोन्नति का कंसिडरेशन मजाक साबित हो रहा है।

एलटी के शिक्षक एक अदद प्रमोशन के लिए तरस रहे हैं। यहां प्रमोशन का इतना बड़ा घालमेल है कि 12 साल जूनियर विषयगत लाभ के नाम पर अपने सीनियर से पहले प्रमोशन पा जा रहा है। इससे सीनियर शिक्षकों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
आयोग से चुने गए प्रवक्ताओं ठोस तर्कों के साथ कोर्ट में हैं। दरअसल, आयोग से चुने गए प्रवक्ताओं की वरिष्ठता में विभागीय अधिकारियों ने बेवजह घालमेल पैदा कर दिया। सीधे-सीधे तय होने वाली वरिष्ठता में अधिकारियों विवाद इंट्रोडयूज कर दिए।
इससे प्रवक्ताओं के हित प्रभावित हो रहे हैं। नाराज प्रवक्ता हाईकोर्ट जाने को मजबूर हुए। अब बेसिक का एलटी में 25 प्रतिशत कोटा आने वाले समय में और विवाद पैदा करेगा। कारण इस प्रमोशन का न तो विभाग के पास कोई ठोस तर्क है न ही विभाग की कोई स्ट्रेटजी। यहां आर्हता भी सवाल बनकर उठ रहा है।

शिक्षा मंत्री शिक्षा में सुधार के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। मगर, विभाग के अंदर विवादों के मकड़जाल पर वो चुप्पी साधे हुए हैं। वरिष्ठता सूची को लेकर राजकीय शिक्षक संघ भी कभी मुखर नहीं रहा। इसकी तमाम वजह बताई जाती हैं।

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