खतरा बनी बरसाती नदियों का टिहरी की डीएम ने लिया संज्ञान

खतरा बनी बरसाती नदियों का टिहरी की डीएम ने लिया संज्ञान

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नई टिहरी। आबादी क्षेत्र के लिए खतरा बनी बरसाती नदी/नालों का जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया है। इसके तहत खतरे की वजह बनी आरबीएम/सिल्ट को हटाने हेतु खुली बोली प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तराखंड राज्य में तमाम बरसाती नदियां चुगान की अनुमति न होने से आबादी के लिए खतरा बन गई हैं। नदियों में आरबीएम/सिल्ट का स्तर आबादी तक पहुंच गया है। यानि नदियों में तबाही की पटकथा तैयार हो चुकी है।

बहरहाल, टिहरी की जिलाधिकारी ईवा आशीष श्रीवास्तव ने इसका संज्ञान लिया है। उन्होंने इस संबंध में उपजिलाधिकारियों और रेखीय विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में ऐसे नदी क्षेत्र जो चुगान हेतु चिहिन्त नहीं हैं किन्तु वहां भारी मात्रा में आरबीएम/सिल्ट जमा हो पर चर्चा की कगई।

जिलाधिकारी ने आरबीएम/सिल्ट नदी को चेनेलाईज किये जाने के सम्बन्ध अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये। जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी नरेन्द्रनगर को हेंवल नदी के बारहथली क्षेत्र एवं उप जिलाधिकारी कीर्तिनगर को अलकनन्दा नदी के ग्राम मड़ी एवं ग्राम नौर क्षेत्र में आरबीएम/सिल्ट हटाये जाने हेतु खुली बोली की प्रक्रिया प्रारम्भ किये जाने के निर्देश दिये।

उन्होने कीर्तिनगर तहसील के अलकनन्दा नदी के सांकरों क्षेत्र से सिल्ट हटाये जाने व नदी को चेनेलाईज किये जाने हेतु भी जिला मुख्यालय पौड़ी से पत्र व्यवहार कर सम्बन्धित क्षेत्र तक पहुंचने हेतु मार्ग की अनुमति लेने को कहा। जिलाधिकारी ने तहसील धनौल्टी के बादल नदी एवं सौंग नदी के चार चिहिन्त क्षेत्र श्रीपुर, धौलागिरी, सिल्ला व भरवाकाटल तथा तहसील घनसाली के चमियाला, मुयालगांव, भौणीखाल व बूढाकेदार क्षेत्र को भी सिल्ट हटाये जाने हेतु चयन करने के निर्देश सम्बन्धित उप जिलाधिकारियों को दिये। बैठक में उप जिलाधिकारी संदीप तिवारी, आकांक्षा वर्मा व फिंचाराम चैहान आदि उपस्थित थे।

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