थैंक्यू केजरीवाल! दिल्ली में गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी भाषा अकादमी

थैंक्यू केजरीवाल! दिल्ली में गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी भाषा अकादमी

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नई दिल्ली। उत्तराखंड में भले ही गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी भाषा को सत्ताधीशों ने तवज्जो नहीं दी हो। मगर, दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसके महत्व को समझा और भाषा अकादमी का गठन किया।

उत्तराखंड में सरकारी सेवा के लिए गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी भाषा की समझ रखने की अनिवार्यता का विरोध हुआ। विरोध करने वाले राजनीतिक तौर और मजबूत हुए। परिणाम उत्तराखंड राज्य में गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी भाषा की बात करने से भी व्यवस्था कतराती है।

इससे इत्तर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी भाषा के महत्व को समझा और भाषा अकादमी का गठन किया। हीरा सिंह राणा को अकादमी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। जल्द ही अकादमी काम करना शुरू कर देगी।

निसंदेह इसके पीछे दिल्ली में बसा पहाड़ी समाज है। आम आदमी पार्टी ने इस समाज की राजनीतिक ताकत को न केवल पहचान बल्कि इसे तवज्जो भी दी। इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तारीफ होनी चाहिए।

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