सरकार! तीर्थ पुरोहितों की कई पीढ़ियां खपी हैं धामों को बनाने में

सरकार! तीर्थ पुरोहितों की कई पीढ़ियां खपी हैं धामों को बनाने में

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सुदीप पंचभैया।
देवप्रयाग। आदिधाम श्री बदरीनाथ समेत राज्य के चारों धामों को बनाने, संवारने और इन्हें तीर्थाटन से जोड़ने में तीर्थ पुरोहितों की कई पीढ़ियां खपी हैं। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस क्षेत्र में तीर्थाटन को तीर्थ पुरोहितों ने खून-पसीने से सिंचा है।

स्वयं को धर्म और संस्कृति का चैंपियन समझने वाली भाजपा के शासन में तीर्थ पुरोहित अपने अस्तित्व के लिए सड़कों पर हैं। उनके द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने से व्यवस्था कतरा रही है। दरअसल, पिछले कुछ समय से राज्य के चारों धामों में विकास के नाम पर नई व्यवस्था थोपने के प्रयास हो रहे हैं। देवस्थानम बोर्ड के नाम से ऐेसा किया भी जा चुका है।

इस पूरे खेल में तीर्थ पुरोहित एवं हक हकूकधारियों को हाशिए पर डाला गया। हालांकि सरकार दावा करती रही है कि किसी का अहित नहीं किया गया है। सरकार बातचीत के लिए भी तैयार है। तीर्थ पुरोहितों के आरोप रहे हैं कि आदिधाम श्री बदरीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री की स्थापना और संवारने में उनके योगदान को भुलाने का प्रयास किया जा रहा है।

तीर्थ पुरोहितों के आरोपों में तथ्य भी नजर आता है। दरअसल, सरकार मौजूदा समय में श्री बदरीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री को देख रही है। सरकार को सोचना चाहिए कि आज से सौ डेढ़ सौ साल पहले धाम कैसे रहे होंगे।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र में स्थित इन धामों तक देश-दुनियां के लोगों को कौन लाया होगा। किसने उक्त धामों को लोगों तक पहुंचाया होगा। किसने धामों के महत्व को हिंदू धर्मावलंबियों के घर-घर तक पहुंचाया होगा। इस पर गौर न करना कहीं न कहीं किसी के योगदान को भुलाना है।

दरअसल, आदि धाम श्री बदरीनाथ श्री केदारनाथ, श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री को बनाने, संवारने और इन्हें तीर्थाटन से जोड़ने में तीर्थ पुरोहितों की कई पीढ़ियां खपी हैं। तब जाकर धाम स्थापित हुए। यहां लहलहा रहा तीर्थाटन तीर्थ पुरोहितों की खून-पसीने की मेहनत का प्रतिफल है।

अब श्री बदरीनाथ में मास्टर प्लान को धरातल पर उतारने की जल्दी हो रही है। सरकार की जल्दी ने तीर्थ पुरोहित एवं हक हकूकधारियों की आशंकाएं और बलवती कर दी हैं। तीर्थ परोहित सवाल उठा रहे हैं कि क्या उन्हें धाम से बेदखल तो नहीं किया जाएगा।

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