जनता पूछ रही विधायकों से अपने काम बताओ

जनता पूछ रही विधायकों से अपने काम बताओ

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देहरादून। चुनाव की तैयारियों में जुट चुके नेताओं से जनता पांच साल के कामकाज का हिसाब मांग रही है। नेता जी हैं कि कभी अलां तो कभी फलां के काम गिना रहे हैं।

उत्तराखंड की जनता के मूड़ को देखते हुए दावे के साथ कहा जा सकता है कि 2022 का चुनाव नेताओं के लिए आसान नहीं रहने वाला है। कम से कम मौजूदा सभी विधायकों पर ये बात लागू होती है। जनता अब दिल्ली मेड नारों में आने वाली नहीं है।

डबल इंजन को ढंग से दिख चुकी जनता अब फ्री के करंट को लेकर भी बहुत ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रही है। यही वजह है कि चुनाव की तैयारियों में जुटे नेताओं से जनता ने उनके पांच साल के कामकाज पर हिसाब मांगना शुरू कर दिया है।

विधायक निधि से लेकर क्षेत्र की तमाम योजनाओं पर सवाल हो रहे हैं। नेताओं के समर्थकों को जनता के सवालों से दो-चार होना पड़ रहा है। राजनीतिक दलों के लिए भी कई नेताओं का पक्ष रखना मुश्किल हो रहा है।

ये बात विभिन्न राजनीतिक दलों के सर्वे में भी सामने आ चुकी है। भाजपा द्वारा राज्य को तीन मुख्यमंत्रियों का तोहफा इसका प्रमाण भी है। बहरहाल, नारों से चुनाव जीते बहुत कम नेता अपने कामों को गिना पा रहे हैं। अधिकांश कभी अलां के बारे में तो कभी फलां का नाम लेकर फिर से अपनी जीत का जुगाड़ कर रहे हैं।

इसके लिए तमाम प्रपंच रचे जा रहे हैं। क्षेत्र के जिन विकास कार्यों और समस्या के समाधान पर पूरे साढ़े चार साल नेता जी चुप्पी साधे रहे उन पर अब सक्रियता दिखा रहे हैं।

सच ये है कि अब हो रही घोषणाएं और दिखाई जा रही सक्रियता का कोई मतलब नहीं है। अब नेताओं को पांच साल में किए गए कार्यों को जनता के बीच रखना चाहिए। जनता की भी नेताओं से यही अपेक्षा है।

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